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काशी विश्वनाथ मंदिर केस में मुस्लिम पक्ष को फिर झटका, होगी सुनवाई

काशी विश्वनाथ मंदिर केस में मुस्लिम पक्ष को फिर झटका, होगी सुनवाई

काशी विश्वनाथ मंदिर मामले में अदालत से मुस्लिम पक्षकारों पर दूसरा बड़ा झटका लग चुका है। मुस्लिम पक्ष के तमाम तर्कों को खारिज करते हुए स्थानीय अदालत ने ज्ञानवापी परिसर स्थित भगवान आदि विशेश्वर को सौंपने के मामले में सुनवाई करने का फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इस प्रकरण को सुनवाई योग्य माना है और मस्जिद पक्ष से दाखिल पोषणीयता के प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि 1936 में दीन मोहम्मद के केस में हुआ फैसला इस केस पर लागू नहीं होता है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर को होगी।

भगवान आदि विश्वेश्वर को सौंपने समेत अन्य मांगों को लेकर विश्व वैदिक सनातन संघ की अंतरराष्ट्रीय महामंत्री किरण सिंह व अन्य ने मुकदमा दाखिल किया था। गुरुवार को सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट महेंद्र कुमार पांडे की अदालत ने कहा कि यह मुकदमा ज्ञानवापी को लेकर 1936 में सुनाए गए दीन मोहम्मद के फैसले से प्रभावित नहीं है, क्योंकि उसमें वादी या हिंदू पक्षकार नहीं थे। इसके साथ ही प्लेसिस आफ वर्शिप एक्ट (स्पेशल प्रोविजन) 1991, वक्फ एक्ट 1995, श्रीकाशी विश्वनाथ एक्ट 1983 से भी यह मामला प्रभावित नहीं है। इसलिए मस्जिद पक्ष का प्रार्थना पत्र खारिज किया जाता है। मस्जिद पक्ष ने, यह मुकदमा सुनने योग्य नहीं है, का तर्क देकर इसे खारिज करने की मांग की थी।

न्यायालय के इस फैसले के बाद अब मंदिर पक्ष की ओर से दाखिल ज्ञानवापी परिसर पर मिले शिवलिंग की पूजा की अनुमति के प्रार्थना पत्र पर भी सुनवाई होगी। भगवान आदि विश्वेश्वर की ओर से किरण सिंह व अन्य द्वारा दाखिल मामले में 17 तारीख को पर पोषणीयता पर आदेश आया है। 24 मई को सिविल जज सीनियर डिविजन की अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया था। इसे अर्जेंट प्रकृति का मान कर अदालत ने इसे स्वीकार किया।

हिन्दू पक्ष की ये है मांग

मंदिर पक्ष के वकील मान बहादुर सिंह और अनुपम द्विवेदी के मुताबिक आदि विश्वेश्वर विराजमान की ओर से दाखिल इस मामले में तीन मांगे की गई हैं। पहला, पूरे ज्ञानवापी परिसर के स्वामी भगवान आदि विशेश्वर है इसलिए यह पूरा क्षेत्र उन्हें सौंप दिया जाए। दूसरा,  भूखंड संख्या 9130 पर मौजूद ज्ञानवापी परिसर के मंदिर पर किए गए अवैध निर्माण को हटाया जाए। तीसरा,  हिंदू धर्म में आस्था रखने वालों के पूजा पाठ में व्यवधान उत्पन्न करने वालों पर रोक लगाई जाए।

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