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#NCR: कानपुर सेंट्रल के पुराने डिप्टी सीटीएम पर लाखों के गोलमाल का आरोप

#NCR: कानपुर सेंट्रल के पुराने डिप्टी सीटीएम पर लाखों के गोलमाल का आरोप

प्रयागराज: उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल का कानपुर सेन्ट्रल स्टेशन इन दिनों भ्रष्टाचार को लेकर चर्चा में है। पिछले दिनों महाप्रबंधक के औचक निरीक्षण में वेंडरों की करतूत का खुलासा और वाणिज्य विभाग के निम्नतम स्तर के कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई का शोर थमा भी नहीं कि डिप्टी सीटीएम पद के कारनामों की भारी-भरकम  शिकायत रेल मंत्रालय से लेकर महाप्रबंधक और मंडल रेल प्रबंधक तक पहुंच गई है। आरोप है कि डिप्टी सीटीएम पद अवैध कमाई का सबसे बड़ा जरिया बन गया है। मुख्यालय और प्रयागराज रेल मंडल के विभागीय अफसरों पर भी इस मिलीभगत का हिस्सा होने का आरोप है।

कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर डिप्टी सीटीएम रहे हिमांशु शेखर उपाध्याय के कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार का आरोप है। प्रयागराज निवासी पत्रकार संतोष उपाध्याय और कानपुर निवासी अश्वनी ने आरोप लगाया है कि कानपुर एरिया में मालभाड़ा से प्राप्त आय में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई है। सीपीसी माल गोदाम , पनकी जैसे जगहों पर ‘स्थान शुल्क और ‘विलम्ब शुल्क’ में जबरदस्त चोरी की जा रही है। विगत दीपावली 2021 के समय अकाउंट के वरिष्ठ यातायात लेखा निरीक्षक अभय कुमार श्रीवास्तव ने सीपीसी माल गोदाम में स्थानशुल्क की चोरी पकड़ी थी, जो माल सीपीसी के शेड में मौके पर रखे पाए गए थे। उनके गोदाम से हटाने का समय बीत चुका था और उसके बाद नियमानुसार लगभग 22 लाख रुपये का स्थान शुल्क बनता था लेकिन कहीं भी इसका रिकॉर्ड नहीं रखा गया।

शिकायत है कि जब टीआईए द्वारा गेट पास रजिस्टर को क्लोज कर दिया गया तो आनन- फानन में करीब 22 लाख रुपए जमा कराए गए। पिछला रिकॉर्ड देखने पर पाया गया कि स्थान शुल्क इससे पहले व्यापारियों के माल पर लगाया ही नहीं जाता था और पर्यवेक्षक तथा डिप्टी सीटीएम को इसके बदले मोटी रकम पहुँचा दी जाती है। अनुमान है कि करीब 30 लाख रुपये प्रतिमाह से भी ज्यादा की रेलवे राजस्व की चोरी इस वक्त धड़ल्ले से की जा रही है। इसमें अन्य जिम्मेदार अधिकारी भी डिप्टी सीटीएम की वजह से आंखे बंद किये रहते हैं।

संतोष ने शिकायत में कहा है कि डिप्टी सीटीएम को मासिक किराए पर जो गाड़ी दी गई है वो केवल कागजों पर ही दौड़ रही है। हकीकत में वो अपनी व्यक्तिगत गाड़ी नम्बर यूपी 78 जीए 0202 से ही कार्यालय व अन्य स्थानों पर आते जाते हैं, जबकि बिल का भुगतान उनके लिए आवंटित गाड़ी का किया जाता है जो कभी इस्तेमाल में आई ही नहीं। जिस गाड़ी से ये आते जाते हैं वह सेन्ट्रल स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज में दिखा जा सकता है। सरकारी पैसे से अपनी प्राइवेट गाड़ी का किस्त अदा करते हैं। लॉगबुक में फर्जी किलोमीटर दर्ज करवाया जाता है। विगत वर्षों से सरकारी गाड़ी सेन्ट्रल पर नहीं आई और हिमांशु शेखर उपाध्याय ने लगभग 2 वर्षों पहले ही गाड़िया ली हैं जिनका नम्बर यूपी 78 जीए 0202 व यूपी 78 जीएच 0202 है। दोनों ही गाड़ी इनकी धर्मपत्नी  ममता उपाध्याय जी के नाम पर है। साथ ही यह भी जांच करवाना आवश्यक है कि ममता उपाध्याय के नाम पर यदि दो गाड़ियां खरीदी गई हैं तो क्या जीएसटी विभाग को सूचित किया गया है।

शिकायत में कहा गया है कि 5 विभागीय रेलवे कर्मचारी डिप्टी सीटीएम के आवास पर जानवरों की देखरेख, चारा पानी एवं अन्य व्यक्तिगत कार्यो के लिए अवैध रूप से काम करते हैं जबकि इन सभी की ड्यूटी रोस्टर में स्टेशन या कार्यालय में दिखाई जाती है। अगर एक कर्मचारी का औसत वेतन 50 हजार रुपये प्रतिमाह भी मान लिया जाए तो 2.5 लाख रुपए प्रतिमाह का भुगतान भारतीय रेलवे कर रही है। जबकि इन सभी कर्मचारियों का उपयोग व्यक्तिगत कार्यो के लिए बंगले पर किया जाता है।

शशि नामक रेलवे कर्मचारी कानपुर कैटरिंग का स्टाफ है जिसकी ड्यूटी रोस्टर में पार्सल कार्यालय में लगाई जाती है जबकि वह ड्राईवर के रूप में सीटीएम के बंगले पर इस्तेमाल किया जाता है। सीटीएम पत्नी ममता उपाध्याय  को ऑफिस से घर और घर से ऑफिस ले जाने का कार्य करते हैं। जिसे सीसीटीवी फुटेज कैमरे में दिखा जा सकता है।

यह भी शिकायत। है कि कानपुर सेन्ट्रल स्टेशन के कैटरिंग स्टाल के संचालको द्वारा प्रति स्टाल कमीशन पहुँचाया जाता है जिसके एवज में ओवरचार्जिंग और निम्न क्वालिटी का फूड बेचने की आजादी दी जाती है। सुविधा शुल्क लेकर ट्रेनों के निर्धारित प्लेटफार्म को बदलने और ओवरचार्जिंग कराने का भी आरोप है।

शिकायत में कहा गया है कि कानपुर एरिया के एनएफआर का टेंडर प्रयागराज मंडल के बजाए पावर कानपुर सेन्ट्रल को देने के बाद से ही   इस मद में रेल राजस्व में जबरदस्त गिरावट हुई है। गंभीर आरोप यह भी है कि कानपुर सेन्ट्रल स्टेशन की कार पार्किंग का ठेका जिसको दिया गया है जिसमें सिर्फ ज्यादा जगह ही नहीं गयी बल्कि लाइसेंस फीस में भी पिछले टेंडर की अपेक्षा लगभग दस प्रतिशत दर से कम करके दिया गया है। पार्किंग ठेकेदार के यहां  कार्यरत एक स्टाफ के अनुसार टेंडर के बदले ठेकेदार के द्वारा एक मोटी रकम डिप्टी सीटीएम और एक तथाकथित सीएमआई विजय शर्मा को दिया जाता है।

डिप्टी सीटीएम पर आरोप है कि स्टेशन आय से नियम विरुद्ध तरीके तत्कालीन सीआरएस अब सीएमआई आरके भारद्वाज से पैसा निकलवा कर उन्होंने अपने पास करीब 6-8 महीनों तक रखा था।

संतोष उपाध्याय का दावा है कि 2020 में मास्क खरीदने के नाम पर बिना मुख्यायल की अनुमित से कानपुर सेन्ट्रल स्टेशन की आय से पांच लाख रुपये की निकासी डिप्टी सीटीएम ने कराकर उस पैसे को करीब छह से आठ महीने तक अपनी कस्टडी में रखा। बाद में अकाउंट द्वारा आपत्ति करने पर फर्जी रसीदें के माध्यम से उस पैसे का उपयोग दिखाया गया और फिर कुछ जमा करा दिया गया। इस अनियमितता की जांच एनसीआर के तत्कालीन पीसीसीएम के द्वारा मुख्यालय स्तर से कराई गई लेकिन लीपापोती कर दी गई।

दोनों शिकायतकर्ताओं का दावा है इस मामले से रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव के निजी सचिव, ओएसडी, सदस्य यातायात, जोनल महाप्रबंधक और डीआरएम से भी कई है।

गौरतलब है कि शिकायतों की भरमार होने के बाद दो महीने पहले ही डिप्टी सीटीएम हिमांशु शेखर उपाध्याय का तबादला एनसीआर मुख्यालय में कर दिया गया था। उनकी जगह कानपुर में नई तैनाती हो चुकी है।

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