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कांग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज को कश्मीर की डेमोग्राफी बदलने का डर, कहा- न दें निवास प्रमाण पत्र

कांग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज को कश्मीर की डेमोग्राफी बदलने का डर, कहा- न दें निवास प्रमाण पत्र

जम्मू और कश्मीर में विवादित धारा 370 खत्म होने के बाद केंद्र सरकार की तरफ से सभी को समान अधिकार दिए जाने और एलओसी के निकट रहने वाले लोगों को भी निवास प्रमाण पत्र जारी करने से कश्मीरी नेताओं को अपनी राजनीति खत्म होने का डर सताने लगा है। कश्मीरी नेताओं ने अब आम कश्मीरियों को जनसांख्यिकी यानी डेमोग्राफी बदलने का को दिखाना शुरू कर दिया है। लोगों को इस बात के लिए उकसाया जा रहा है कि सरकार की नीति कश्मीर में मुसलमानों को अल्पसंख्यक बना सकती है।

जम्मू कश्मीर की डेमोग्राफी में बदलाव की आशंका पीडीपी या नेशनल कांफ्रेंस ने नहीं, कांग्रेस नेताओं की तरफ से उठाई गई है।

कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सैफुद्दीन सोज ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में बड़ी संख्या में निवासी प्रमाणपत्र जारी करने से कश्मीरियों को इससे जनसांख्यिकीय (डेमोग्राफिक) परिवर्तन होने की आशंका है।

गौरतलब है कि सरकार एलओसी के निकट रहने वाले लोगों को भी निवास प्रमाण पत्र दे रही है जिनकी बड़ी आबादी बताई जा रही है। अब तक कश्मीर में रह रही है। आबादी मतदान करने समेत तमाम सुविधाओं से वंचित थी। राज्य में दलितों को आरक्षण की सुविधा भी नहीं मिल रही थी लेकिन धारा 370 खत्म होने के बाद सरकार ने कश्मीर में देश के अन्य हिस्सों की तरह दलितों को आरक्षण की सुविधा दिलाना शुरू कर दिया है।

उधर विवादित धारा 370 खत्म होने के बाद पीडीपी नेताओं ने पहली बार राज्य में बैठकें की हैं। मानसून सत्र में नेशनल कांफ्रेंस के मुखिया फारुख अब्दुल्ला ने भी हिस्सा लिया है। इसके साथ ही अब कश्मीर में राजनीतिक प्रक्रिया भी तेज हो गई है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने राज्य में स्थानीय नेताओं से बातचीत कर राजनीतिक प्रक्रिया को पटरी पर लौटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

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