Nationalwheels

एक्सपर्ट्स से जाने क्यों बढ़ रहे हैं कोरोना के गंभीर केस, प्लाज्मा नहीं मिलने पर क्या करें

एक्सपर्ट्स से जाने क्यों बढ़ रहे हैं कोरोना के गंभीर केस, प्लाज्मा नहीं मिलने पर क्या करें

देश में कोरोना के एक्टिव केस बढ़ने के साथ ही गंभीर मरीजों की भी संख्या बढ़ती जा रही है। ऐसे में कई लोग मान रहे हैं कि क्या वायरस ने अपना स्वरूप बदल लिया है। बदलते मौसम के साथ वायरस का क्या प्रकोप होगा। ऐसे ही तमाम प्रश्नों के लिये देश के जाने माने स्वास्थ्य विशेषज्ञों से खास बातचीत की।

क्या भारत में वायरस ज्यादा पावरफुल हो गया है?

आईएमए के पूर्व सचिव डॉ. नरेंद्र सैनी बताते हैं कि अब तक जितने भी शोध हुए हैं, उनके अनुसार अभी तक वायरय में कोई परिवर्तन नहीं आया है, क्योंकि अगर वायरस में परिवर्तन हो गया तो, हमारे वैक्‍सीन बनाने की प्रक्रिया गड़बड़ा जाएगी। क्योंकि हम एक विशिष्‍ट वायरस के खिलाफ ही वैक्सीन बना रहे हैं। बदलाव केवल यह आया है कि पहले हम लॉकडाउन में थे, तो दूसरों से दूरी बनी हुई थी। सरकार ने पाबंदी हटायी तो नियमों का पालन करने का अनुरोध किया। बहुत बड़ी संख्‍या में लोग मास्‍क नहीं लगा रहे हैं, दो गज की दूरी नहीं बना रहे हैं, तो संक्रमण तो फैलेगा ही। संक्रमितों की संख्‍या बढ़ने का जिम्मेदार न तो वायरस है न सरकार, केवल वो लोग हैं, जो लापरवाही कर रहे हैं।

कोरोना के गंभीर मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है, इसकी वजह क्या है?

एम्स के डॉ नीरज निश्चल कहते हैं कि ऐसा इसलिये हो रहा है क्योंकि अनलॉक में लोग लापरवाही बरत रहे हैं। दूसरी बात हमारे यहां टेस्टिंग भी बढ़ रही है। गंभीर मरीजों की संख्या इसलिए बढ़ रही है क्योंकि इस बीमारी में 5-10 प्रतिशत संक्रमित कोमोरबिडिटी के मरीज होते हैं। अगर पूरी संख्‍या को देखें तो जब 10 हजार संक्रमित एक दिन में आ रहे थे, तब उनमें 500 से 1000 कम लगते हैं, लेकिन अब एक दिन में 1 लाख केस आ रहे हैं, तो इसका मतलब 5 हजार से 10 हजार लोग गंभीर रूप से बीमार हो रहे हैं।

क्या कोरोना के मरीजों का ऑक्सीजन लेवल नीचे जाने पर स्थिति बहुत जल्दी गंभीर हो जाती है?

डॉ. निश्चल ने कहा कि कोरोना वायरस को कतई हल्के में नहीं लें। अधिकांश लोग आराम से ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ मरीजों में स्थिति 2 से 3 घंटे में ही इतनी खराब हो जाती है कि उन्हें ICU में भर्ती करना पड़ता है। अब जो लोग आसानी से ठीक हो जा रहे हैं, वो दूसरों से कहते हैं, “अरे कोरोना कुछ नहीं, ये तो सामान्य सर्दी-जुकाम है।” सच तो यह है कि जिनके घर में कोई गंभीर स्थिति से गुजरा है, या ऑक्सीजन की कमी के बाद वेंटिलेटर की नौबत आ गई, वही जानते हैं कि यह वायरस कितना खतरनाक है।

कई लोग प्लाज्मा नहीं मिलने पर परेशान हो जाते हैं, वे क्या करें?

जब किसी मरीज के लिए प्लाज्मा नहीं मिल पाता है, तो परिजन परेशान हो जाते हैं। उन्हें लगता है प्लाज्मा नहीं मिलेगा तो उनका मरीज बचेगा नहीं। ऐसा नहीं है, अक्सर जिन्हें प्लाज्मा दिया गया उनकी तबियत में कोई सुधार नहीं भी दिखा है। कई बार डोनर (donar) के प्लाज्मा में मौजूद एंटीबॉडी असरकारी नहीं होते हैं, तो कई बार मरीज को प्लाज्मा देने के बाद उसके शरीर में एंटीबॉडी बढ़ते नहीं हैं।

होम आइसोलेशन में क्या सावधानी रखनी है?

अगर परिवार के सभी सदस्य संक्रमित हो गए हैं तो ज्यादा परेशानी नहीं होती। सभी एक जैसी सावधानी रखते हैं। लेकिन किसी एक को कोरोना हुआ है तो परिवार के अन्य लोगों को बहुत ज्यादा सतर्क रहना है। परिवार के साथ ही मरीज को भी मास्क पहन कर रहना है। डेली रुटीन की सभी चीजें अकेले करनी हैं। परिवार के साथ नहीं उठे-बैठें। पल्स ऑक्सिमीटर साथ में रखें और अगर ऑक्सीजन लेवल कम हो तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें। खुद से कोई दवा न लें और न ही किसी अन्य के कहने पर लें। सिर्फ डॉक्टर और अस्पताल की सलाह पर ही कोई दवा लें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *