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आस्था या अंधविश्वास? भरतपुर में बच्चों के मुंडन के बाद मुर्गे से लिया जाता है आशीर्वाद



<p style="text-align: justify;"><strong>Rajasthan News: </strong>राजस्थान के भरतपुर जिले में बच्चों के मुंडन कराने और उनको नजर से बचाने के लिए कुएं वाला मेले का आयोजन हुआ. जिसमें लोग अपने बच्चों को लेकर पहुंचे और उनका मुंडन कराने के बाद मुर्गे द्वारा आशीर्वाद दिलवाया. इसके बाद झाड़-फूक दिलाई गई. इस दौरान भारी संख्या में महिला और पुरुष अपने छोटे बच्चों को लेकर मेले में पहुंचे और अपने बच्चों के सिर पर मुर्गा घुमवाया. कई लोगों का कहना है की वैज्ञानिक युग में यह आस्था है या अन्धविश्वास? &nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>हर साल आषाढ़ में लगता है मेला</strong><br />जानकारी के मुताविक हर वर्ष आषाढ़ के महीने के प्रत्येक सोमवार को कुआं की जात का मेला लगता है. इस मेले में बच्चों के मुंडन कराने और उनको नजर और भूत-प्रेत के साये से बचाने के लिए मुर्गे द्वारा आशीर्वाद दिलाया जाता है. यह मेला वर्ष में एक ही बार लगता है. बता दें कि यह मेला जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय के पास ही लगता है, जहां सैकड़ों की संख्या में महिलाएं अपने छोटे बच्चों को लेकर आती हैं. इस दौरान मेले में मुर्गे वाले खूब कमाई करते हैं. मुर्गे वाले पैसे लेकर बच्चों के सिर पर मुर्गा फेरते हैं और उनको मुर्गे से आशीर्वाद दिलाते हैं.&nbsp;</p>
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<p style="text-align: justify;"><strong>मुर्गे वालों का क्या कहना है&nbsp;</strong><br />मुर्गे वालों ने कहा कि यह मेला कुआं वाली जात के नाम से जाना जाता है, जो वर्ष में एक बार लगता है. इसमें लोग अपने छोटे बच्चों को लेकर आते हैं और यहां उनका मुंडन करवाया जाता है, जिसके बाद मुर्गे द्वारा उनको आशीर्वाद दिलाया जाता है. जिससे बच्चे किसी भी प्रकार की बुरी नजर से सुरक्षित रहते हैं.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>मेले में आई महिलाओं का क्या है कहना&nbsp;</strong><br />कुआं वाली जात के मेले में आई महिलाओं का कहना है कि यह हमारे बुजुर्गों के जमाने से रीत चली आ रही है. हम भी उसी के अनुसार बच्चों को नजर-गुजर, टोना-टोटका, भूत प्रेत के साये से बचाने के लिये बच्चों के सर पर मुर्गा घुमवाते हैं. साथ ही बच्चों को ठीक रखने की मन्नत मांगते हैं. &nbsp;</p>
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