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‘आज की शाम गुज़ारेंगे हम छतरी में, बारिश होगी ख़बरें सुन कर आया हूँ’..

‘आज की शाम गुज़ारेंगे हम छतरी में, बारिश होगी ख़बरें सुन कर आया हूँ’..

ओम प्रकाश सिंह 

अयोध्या। रामनगरी की सबसे बड़ी और आधे जिले के खेतों को पानी देने वाली शारदा सहायक नहर में अभी तक पानी नहीं आया है। मुख्य नहर और इससे निकलने वाली माइनर में सिल्ट की सफाई भी नहीं हुई है।  मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 22 जून से मानसून आ जाएगा। अक्टूबर के महीने तक कुल मिलाकर 53 दिन बारिश का अनुमान है। इन्हीं अनुमानों के आधार पर किसी शायर ने लिखा है कि आज की शाम गुज़ारेंगे हम छतरी में, बारिश होगी ख़बरें सुन कर आया हूँ…।

लू कम हुई है। फिरभी, आग उगलती गर्मी से खेत की माटी नंगे पैरों को जला रही है। नहरों में पानी नहीं है तो सिंचाई के महंगे साधनों ने किसानों की कमर तोड़ दी है। पानी के इंतजार में कुछ किसानों ने धान की रोपाई के लिए बेरन भी देर से डाला है। अधिकांश किसानों की बेरन रोपाई के लिए तैयार है। सिंचाई पानी के सरकारी इंतजाम से इतर किसान आसमान की ओर टुकटुकी लगाए बादलों का इंतजार कर रहा है।
जुलाई के पहले हफ्ते में ही ज्वार, बाजरा, अरहर, मूंग, तिल की बोवाई लिए भी किसान पानी का इंतजार कर रहा है। समय से पानी न मिला तो इन फसलों के दानों और पैदावार पर असर पड़ेगा। खेत जोत बखर नहीं पाने से खेतों में घास खरपतवार बढ़ जाने का डर उन्हें सता रहा है। यदि अभी से वह खेतों को आगे आने वाली फसल के लिए तैयार नहीं कर पाये तो समय पर बोआई भी नहीं हो पायेगी जिसमें उनकी फसल की पैदावार कम होने की चिंता उन्हें सता रही है। बारिश के अभाव में हो रहे नुकसान से किसानों की वर्ष भर की दिनचर्या को गड़बड़ा सकती है।

वहीं ज्योतिष जानकारों का कहना है कि सूर्य का आद्रा नक्षत्र में प्रवेश 22 जून को होगा। इसी के साथ वर्षाकाल की शुरुआत होगी। उनके अनुसार सूर्य के आद्रा प्रवेश के साथ ही वर्षा ऋतु शुरू होती है। मौसम वैज्ञानिकों का भी अनुमान है कि इस बार मानसून का आगमन भी 22 जून के आसपास ही हो रहा है। अनुमान है कि जून में 6 दिन, जुलाईं में 15 दिन, अगस्त में 14 दिन, सितम्बर में 14 दिन, अक्टूबर मे 4 दिन कुल मिलाकर 53 दिन बारिश होगी।

इस बार रोहिणी का वास पर्वतीय होने के कारण खंडवृष्टि के योग बनेंगे। इस बार आद्रा प्रवेश धनु लग्न में हो रहा है। इसके साथ ही लग्नेश गुरु स्वयं की राशि मीन में रहेंगे, इस लिहाज से फसलों के अनुकूल बारिश होने का अनुमान है। मौसम वैज्ञानिकों और ज्योतिष की भविष्यवाणी पढ़कर किसान की चिंता कुछ कम होती है लेकिन सरकारी मशीनरी अपना दायित्व ठीक से निभाए तो देश का अन्नदाता भी खुशहाल हो सकेगा।

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