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अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला ‘मिलेट्स और ऑर्गेनिक्स-2023’ का आयोजन, हमारे बाजरे से रूबरू होंगे दुनिया के देश

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला ‘मिलेट्स और ऑर्गेनिक्स-2023’ का आयोजन, हमारे बाजरे से रूबरू होंगे दुनिया के देश

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला ‘मिलेट्स और ऑर्गेनिक्स-2023’ का आयोजन, हमारे बाजरे से रूबरू होंगे दुनिया के देश

वह दिन दूर नहीं जब दुनिया के देश हमारे बाजरे के स्वाद से रूबरू होंगे। आज मोटे अनाज को देश के साथ-साथ विदेशों में भी लोकप्रिय बनाने की पहल शुरू हो चुकी है। विदेशों में मोटे अनाज को लोकप्रिय बनाने और बाजरा आदि के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए मिलेट्स और ऑर्गेनिक्स पर अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2023 का आयोजन किया जा रहा है।

कहां हो रहा है आयोजन

तीन दिवसीय मिलेट्स और ऑर्गेनिक्स 2023 – अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले का आयोजन 20 जनवरी से बेंगलुरु के त्रिपुरवासिनी में हो रहा है। व्यापार मेला जैविक और बाजरा क्षेत्र में किसानों, किसान समूहों, घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों, केंद्रीय और राज्य संस्थानों के लिए कृषि, बागवानी, प्रसंस्करण, मशीनरी और कृषि-प्रौद्योगिकी में अवसरों को तलाशने का एक मंच है। मेले में 250 से अधिक स्टॉल लगाए गए है।

किसानों की आय में हुई वृद्धि

बेंगलुरु में आयोजित हो रहे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। इसको कृषि निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि के माध्यम से देखा जा सकता है। किसानों के लिए बजट आवंटन में 6 गुना वृद्धि हुई है। इसके अलावा केंद्र सरकार ने 10,000 एफपीओ का लक्ष्य भी निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि बाजरा का सेवन कुपोषण का समाधान है, जिससे किसानों को बेहतर आजीविका और आय में वृद्धि का भी लाभ मिलेगा।

वैश्विक स्तर पर बाजार

मोटे अनाज की खेती कम लागत और कम पानी में हो जाती है। इस फसल में रोग भी कम लगते हैं जिससे कीटनाशकों का उपयोग भी ना के बराबर ही होता है। सारी दुनिया में उत्पादित कुल बाजरे का 41 फीसद बाजरा हमारे देश में होता है। मिलेट वर्ष  2021-22 के बाद बाजरा के निर्यात में 8 प्रतिशत से भी अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे यह साफ हो जाता है कि विदेशों में बाजरा सहित भारतीय मोटे अनाज की मांग बढ़ेगी और इसका लाभ देश के किसानों को भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मिलेगा। 2021-2026 की पूर्वानुमान अवधि के दौरान वैश्विक बाजार में बाजरे की बढ़ोतरी की दर (सीएजीआर) 4.5 फीसदी रहने का अनुमान है।

अंतरराष्ट्रीय बाजरा वर्ष (IYM)- 2023

पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बाजरा वर्ष (IYM)- 2023 के प्रस्ताव को प्रस्तुत किया था, जिसे संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने स्वीकार कर लिया। इसके बाद बड़े पैमाने पर मोटे अनाज को लेकर जागरूकता पैदा करने और उत्पादन बढ़ाने के लिए 2023 को अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष (IYM) के रूप में मनाया जा रहा है। पीएम मोदी ने भारत को ‘गोल्डन ग्रेन’ बाजरा के लिए वैश्विक हब के रूप में स्थापित करने के साथ-साथ IYM 2023 को ‘जन आंदोलन’ बनाने के लिए अपना दृष्टिकोण भी साझा किया है। आपको बता दें, सिंधु घाटी सभ्यता के दौरान बाजरे की खपत को लेकर कई साक्ष्य बताते हैं कि यह भारत में पैदा की जाने वाली पहली फसलों में से एक थी। वर्तमान में 130 से अधिक देशों में उगाए जाने वाले बाजरा को पूरे एशिया और अफ्रीका में आधे अरब से अधिक लोगों के लिए पारंपरिक भोजन माना जाता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजरा वर्ष (IYM)- 2023 के भव्य उत्सव के माध्यम से ‘मिरेकल मिलेट्स’ की भूली हुई महिमा को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है। मिलेट्स को लोकप्रिय बनाने के लिए केंद्र सरकार लगातार प्रयास कर रही है। चाहे फूड फेस्टिवल हो या कॉन्क्लेव सभी में मोटे अनाज से बने उत्पादों से विदेशियों को आकर्षित करने और निर्यात को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। दिल्ली में सांसदों के लिए लंच का आयोजन हो या G20 की बैठक हो सभी में मोटे अनाज से तैयार व्यंजनों को प्रमुखता से परोसा जा रहा है।

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