गोरखपुर: हादसा या मासूमों की हत्या?

गोरखपुर: हादसा या मासूमों की हत्या?
— आपरेटर की चेतावनी भी नजरअंदाज की गई
— कमीशन के खेल में मासूमों की चढ़ गई बेल
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शहर गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल काॅलेज में दो दिन में 30 मासूमों की मौत के मामले में काॅलेज प्रशासन की लापरवाही खुलकर दिखने लगी है। मीडिया के सामने आई आक्सीजन आपरेटर की चिठ्ठी मेडिकल प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रही है। आशंका है कि बकाया भुगतान “कमीशन” के लेनदेन में देरी के कारण रुका पड़ा था। मासूमों की मौत का प्रकरण उठने पर आनन-फानन आपरेटर के बकाये का भुगतान कर दिया गया। चिठ्ठी में आपरेटर ने चेतावनी दी है कि आक्सीजन की मात्रा काफी कम है। इससे मासूमों की जान जा सकती है। फिरभी भुगतान रुका रहा। यह पेच पिछले 10-12 दिनों से फंसा था और अंतत: मासूमों की जान से खिलवाड़ हो गया। ऐसे में यह कहना अनुचित नहीं होगा कि यह हादसा नहीं हत्या है।

मुख्यमंत्री को दी गलत रिपोर्ट?
शुक्रवार को हादसे की खबर फैलने पर डीएम की रिपोर्ट पर प्रदेश सरकार की ओर से बयान जारी हुआ कि आक्सीजन की कमी नहीं थी। यह भ्रामक खबर है लेकिन आपरेटर की चिठ्ठी सामने आने के बाद यह साफ है कि स्थानीय प्रशासन ने लीपापोती की कोशिशें हुईं। मेडिकल प्रशासन की रिपोर्ट को ही डीएम ने शासन को भेज योगी सरकार को गुमराह करने की कोशिश की।

योगी ने दो-दो मंत्रियों को गोरखपुर भेजा
हादसे की गंभीरता के आकलन में हुई चूक का अंदेशा होने पर सीएम ने शनिवार सुबह ही स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के मंत्रियों सिद्धार्थनाथ सिंह व आशुतोष टंडन को बुला हालात की जानकारी ली। साथ ही दोनों को गोरखपुर रवाना किया। समझा जा रहा है कि इस मामले में कइयों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है।

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