यूपी का सरकारी विद्यालय बना मदरसा, रविवार की जगह छुट्टी शुक्रवार को, मामले की जांच शुरू

देवरिया के सलेमपुर क्षेत्र के एक सरकारी परिषदीय विद्यालय को मदरसे की तरह संचालित किए जाने का मामला सामने आया है. विद्यालय के एक संप्रदाय विशेष के प्रधानाध्यापक ने यहां ऐसी परंपरा की नींव रखी जो किसी भी सरकारी संस्थान में मान्य नहीं है. प्रधानाध्यापक साप्ताहिक अवकाश रविवार की जगह शुक्रवार को रखते हैं. विद्यालय के सभी कामकाज हिंदी के बजाए उर्दू में किए जाते हैं. इस मामले का खुलासा होने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग और देवरिया जिला प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है. DM ने प्रकरण में बीएसए को जांच कर कार्रवाई का निर्देश दिया है.
शिकायत की जांच में हुआ खुलासा
सलेमपुर के खंड शिक्षा अधिकारी ज्ञान चंद्र मिश्र को बृहस्पतिवार को इस मामले की जानकारी मिली थी कि प्राथमिक विद्यालय नवलपुर प्रत्येक शुक्रवार को बंद रहता है. जांच के लिए खंड शिक्षा अधिकारी ने बीआरसी से दो शिक्षकों देवी शरण सिंह और हरेंद्र द्विवेदी को विद्यालय भेजा. दोनों लोग सुबह 9:45 बजे स्कूल पहुंचे तो वह बंद मिला. यही नहीं प्राथमिक विद्यालय के भवन पर प्राथमिक विद्यालय नवलपुर की जगह इस्लामिया प्राइमरी स्कूल नवलपुर लिखा हुआ पाया गया. दोनों ने विद्यालय के नाम की फोटो खींचकर खंड शिक्षा अधिकारी को पूरी रिपोर्ट दी. इसके बाद खंड शिक्षा अधिकारी ने विद्यालय के प्रधानाध्यापक खुर्शीद अहमद को सभी पत्रावलियों के साथ कार्यालय तलब किया. जांच में पाया गया कि काफी समय से उच्च विद्यालय शुक्रवार को बंद रहता है. इसके बदले रविवार को खोला जाता है. रजिस्टर की जांच में भी इसकी पुष्टि हुई है.
दस वर्ष से चल रहा यह क्रम
खंड शिक्षा अधिकारी की पूछताछ में प्रधानाध्यापक खुर्शीद अहमद ने बताया कि विद्यालय में पंजीकृत 91 छात्रों में से करीब 95 फ़ीसदी मुस्लिम समुदाय के हैं. इसलिए जुम्मे को विद्यालय बंद कर रविवार को खोलते हैं. प्रधानाध्यापक ने यह भी दावा किया कि वह 2008 में इस विद्यालय में जब आए थे, उसके पहले से ही यहां यह परंपरा चली आ रही थी. उन्होंने पिछली परंपरा का ही पालन किया है.
प्रधानाध्यापक के जवाब से यह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि पिछले एक दशक से कोई भी खंड शिक्षा अधिकारी या जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी या कोई भी अन्य जिम्मेदार अधिकारी इस विद्यालय में आज तक नहीं पहुंचा है. यदि विद्यालय में छोटे बड़े अफसरों के निरीक्षण और दौरे हुए तो इसके पहले यह गलती क्यों नहीं पकड़ी गई?
बेसिक शिक्षा अधिकारी संतोष कुमार देव पांडे ने कहा कि प्रधानाध्यापक ने विद्यालय की स्थापना के समय से ही ऐसी परंपरा की बात कही है. पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है. विद्यालय में तमाम जरूरी पत्राचार भी आपस में उर्दू में ही किए गए हैं. जबकि परिषदीय विद्यालय हिंदी माध्यम के अलावा सिर्फ अंग्रेजी माध्यम से ही संचालित हो सकता है.
जिलाधिकारी सुजीत कुमार ने कहा इस मामले में BSC से रिपोर्ट तलब की गई है बिना किसी निर्दोष अथवा आदेश की शुक्रवार को विद्यालय बंद रखना और रविवार को खोलना गंभीर मामला है इसके लिए जो भी जिम्मेदार होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

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