दृष्टिबाधित यात्रियों को ट्रेनों की सीट तलाशने में नहीं होगी परेशानी

दृष्टि बाधित यात्रियों के लिए ट्रेनों के कोचों में चढ़ना और सीट तक पहुंच कर बैठना हमेशा से मुश्किल भरा काम रहा है लेकिन यात्री सुविधाओं में निरंतर प्रगति कर रहा रेलवे अब इस दिशा में भी कदम उठा रहा है. उत्तर मध्य रेलवे ने दृष्टिबाधित यात्रियों के लिए ब्रेल लिपि में कोचों के बाहर और अंदर संकेतक लगाने का काम किया है. रेल मंत्री ने भी उत्तर मध्य रेलवे की इस पहल की सराहना की है.

उत्तर मध्य रेलवे ने एक दिन पहले ही शुरू हुई इलाहाबाद-आनंद विहार हमसफर एक्सप्रेस, इलाहाबाद-नई दिल्ली प्रयागराज एक्सप्रेस, इलाहाबाद-जयपुर एक्सप्रेस, कानपुर नई दिल्ली श्रम शक्ति एक्सप्रेस, इलाहाबाद-उधमपुर एक्सप्रेस, संगम एक्सप्रेस, कानपुर-नई दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस में ब्रेल लिपि के संकेतक लगा दिए हैं. आगरा-नई दिल्ली इंटरसिटी एक्सप्रेस और आगरा-झांसी एक्सप्रेस में संकेतक लगाने के काम तेजी से चल रहे हैं दो जल्द पूरे हो जाएंगे.
उत्तर मध्य रेलवे ने जॉन के 1452 कोचों में से 552 कोचों में अब तक ब्रेल लिपि संकेतक लगाने का काम पूरा कर लिया है 100 अन्य कोचों में भी इसे लगाने की प्रक्रिया चल रही है. शेष 800 कोचों में ब्रेल लिपि संकेतक लगाने का काम जल्द शुरू हो जाएगा.
क्या है ब्रेल लिपि
ब्रेल लिपि ऐसी लिखावट का इस्तेमाल किया जाता है जिसमें उभरे हुए युग्मों से बने शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है. दृष्टिबाधित व्यक्ति देख ना सकने के कारण इसे छू कर अंकों को सही पहचान सकते हैं. लुई ब्रेल ने इस लिपि का विकास किया है. दुनियाभर में दृष्टिबाधित इन लोगों के लिए इसी लिपि का इस्तेमाल किया जा रहा है. उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक mc चौहान की ओर से कहा गया है कि जोन के शत प्रतिशत कोचों में ब्रेल लिपि संकेतक का इस्तेमाल किया जाएगा. यह काम चरणबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
रेल मंत्री पीयुष गोयल ने ट्वीट किया है कि दृष्टिबाधित यात्रियों की सुविधा के लिये उत्तर मध्य रेलवे ने ट्रेन के डिब्बों और सीटों पर ब्रेल लिपि में संकेतक लगाये हैं. शीघ्र ही इस प्रकार के संकेतक अन्य डिब्बों में भी लगाये जायेंगे. रेलवे की ओर से शुरु की गयी यह सेवा दृष्टिबाधित यात्रियों के सफर को और अधिक सुविधाजनक बनायेगी।

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