स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद: प्रधानमंत्री को लिखा खत, पर नहीं आया जवाब

गंगा की निर्मलता और अविरलता के लिए आमरण अनशन कर रहे स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद का निधन
ऋषिकेश । गंगा की निर्मलता और अविरलता बनाए रखने के लिए विशेष एक्ट पास करने की मांग को लेकर आमरण अनशन कर रहे स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद का आज ( 11 अक्टूबर ) दोपहर बाद एम्स ऋषिकेश में निधन हो गया. स्वामी सानंद मेडिकल के छात्रों के लिए अपना शरीर एम्स ऋषिकेश को दान कर गए हैं. बुधवार ( 10 अक्टूबर ) को स्वामी सानंद को एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया गया था . लगातार कई महीनों से अनशन पर बैठे स्वामी ने 9 अक्टूबर को जल भी त्याग दिया था. वह 22 जून से गंगा के लिए कानून बनाने की मांग को लेकर अनशनरत थे.
स्वामी सानंद के निधन से आहत मातृ सदन के संस्थापक स्वामी शिवानंद ने आरोप लगाया है कि स्वामी जी की हत्या हुई है. उन्हें एम्स ले जाते वक्त मैंने कहा था कि वहां उनको मार दिया जाएगा और वैसा ही हुआ. वहीं ब्रहृचारिणी विभा दीदी ने कहा है कि स्वामी सानंद ने गंगा के लिए जान दी है.
स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद उर्फ प्रोफेसर जीडी अग्रवाल ने गंगा रक्षा के लिए अपनी तरफ से तैयार ड्राफ्ट के आधार पर एक्ट बनाने के लिए केंद्र सरकार को नौ अक्तूबर तक का समय दिया था. मांग पूरी न होने पर वह दस अक्तूबर से जल त्यागकर अनशन पर बैठ गए थे. स्वामी सानंद ने 13 जून को प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था, लेकिन पत्र का कोई जवाब न आने पर वह 22 जून को अनशन पर बैठ गए थे. कुछ दिनों बाद प्रशासन ने उन्हें जबरन उठाकर एम्स में भर्ती कराया था. कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद उन्हें वापस मातृसदन छोड़ा गया था . केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने मातृसदन में स्वामी सानंद ने मिलकर अनशन समाप्त करने की अपील की थी. इस बीच उन्हें कई बार एम्स में भर्ती कराया गया, लेकिन स्वामी ने अनशन नहीं तोड़ा.

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