सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा मामले में सुनवाई पूरी, एससी ने फैसला किया सुरक्षित

घूसकांड के बाद पद से जबरन छुट्टी पर भेजे गए सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा मामले में सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई पूरी हो गई है. दोनों पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. कोर्ट ने बाद में फैसला सुनाने को कहा है.इसके पहले हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के अधिवक्ता से सवाल किया कि सीबीआई के दोनों अधिकारियों के बीच झगड़ा रातोंरात तो नही हुआ ये जुलाई से चल रहा था तो डायरेक्टर आलोक वर्मा को हटाने से पहलों चयन समिति से परामर्श क्यों नही किया गया.

घूसकांड को लेकर सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच मचे घमासान, राकेश अस्थाना के खिलाफ जांच और छापेमारी के बाद केंद्र सरकार ने आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना को जबरन छुट्टी पर भेज दिया. साथ ही कई अफसरों के स्थानांतरण भी कर दिए.
इसी मुद्दे को लेकर निदेशक आलोक वर्मा व एनजीओ कॉमन कॉज ने केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. प्रकरण में आलोक वर्मा का कहना था कि उनकी नियुक्ति के लिए बनी कमेटी की सलाह हटाने के लिए नहीं ली गई.
केंद्र सरकार ने कोर्ट में तर्क दिया है कि सीबीआई में आम जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए आपस में लड़ रहे दोनों अफसरों को मामले की जांच पूरी होने तक छुट्टी पर भेजा गया है. सरकार को इस कार्रवाई का अधिकार है. यह कार्रवाई सीवीसी की जांच के बाद की गई है.
याचिका में आलोक वर्मा ने केंद्र सरकार पर जांच एजेंसी के कार्यों में दखल देने का आरोप लगाया है. उनका यह भी आरोप था कि सरकार जांच रिपोर्ट मनमुताबिक चाहती है. सरकार की इच्छा के अनुसार चलने के लिए ही विशेष निदेशक को तैनात किया है, जबकि सीबीआई में ऐसा कोई पद नहीं है. फिलहाल, आलोक वर्मा की वापसी अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ही निर्भर करेगी.
गौरतलब यह भी है कि कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया था कि सीबीआई राफेल सौदे की जांच कर रही थी. जांच के शुरुआती दौर में मोदी सरकार के खिलाफ कुछ प्रमाण मिले थे, इसलिए सरकार ने उन्हें रातोंरात हटा दिया. फिलहाल, वर्तमान में संयुक्त निदेशक एम. नागेश्वर राव को प्रभारी निदेशक बनाया गया है. उनकी के नेतृत्व में दो दिन पहले दुबई से वीवीआईपी हेलीकॉप्टर सौदे के दलाल क्रिश्चियन मिशेल को दिल्ली लाया गया है. 

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