दहेज उत्पीड़न मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बदला अपना पुराना फैसला, अब तुरंत गिरफ्तारी संभव

सुप्रीम कोर्ट ने दहेज उत्पीड़न मामले (498 A) में तुरंत गिरफ्तारी पर रोक के खिलाफ दायर याचिकाओं पर शुक्रवार को अहम फैसला सुनाया है. मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस ए.एम.खानविलकर और जस्टिस डी.वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने अपने पुराने फैसले में संशोधन करते हुए कहा है कि शिकायतों के निपटारे के लिए परिवार कल्याण कमेटी की जरूरत नहीं है. पुलिस को आवश्यक लगे तो वह आरोपी को तुरंत गिरफ्तार कर सकती है.
आरोपी के लिए अग्रिम जमानत का विकल्प खुला
मामले में आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी पर लगी रोक हटाते हुए कोर्ट ने कहा कि पीड़ित की सुरक्षा के लिए ऐसा करना जरूरी है. कोर्ट ने आगे कहा कि आरोपी के पास अग्रिम जमानत का विकल्प खुला है. बता दें कि इसी साल अप्रैल माह में सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.
सुप्रीम कोर्ट ने पलटा 2017 के फैसले
पिछले साल 27 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की बेंच ने अपने पुराने फैसले में कहा था कि आईपीसी की धारा-498 ए यानी दहेज प्रताड़ना के केस में सीधे गिरफ्तारी नहीं होगी, लेकिन इस फैसले के बाद चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने कहा था कि दहेज प्रताड़ना मामले में दिए फैसले में जो सेफगार्ड दिया गया है, उससे वह सहमत नहीं हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दहेज प्रताड़ना मामले को देखने के लिए हर जिले में एक परिवार कल्याण समिति बनाई जाए जो शिकायत के पहलुओं पर जांच करें और समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही जरूरी हो तो गिरफ्तारी होनी चाहिए, उससे पहले नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने दहेज प्रताड़ना मामले में कानून के दुरुपयोग पर चिंता जाहिर की थी. लीगल सर्विस अथॉरिटी से कहा है कि वह प्रत्येक जिले में परिवार कल्याण समिति का गठन करे. इसमें सिविल सोसायटी के लोग भी शामिल हों.

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