स्मृति ईरानी ने कहा- रजस्वला अवस्था में भगवान के घर कैसे जाया जा सकता है

नई दिल्ली । सबरीमाला मंदिर में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद भी महिलाओं के प्रवेश न कर पाने पर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा है कि अगर रजस्वला अवस्था में महिलाएं जब खून से सना पैड लेकर दोस्त के घर नहीं जातीं तो भगवान के घर कैसे जा सकती हैं. पूजा करना मेरा अधिकार है, लेकिन अपवित्र करना नहीं.

एक कार्यक्रम में जाहिर किए गए अपने राय के कुछ ही देर बाद स्मृति ईरानी ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक नया वीडियो डाला.  वीडियो के मुताबिक वह अपने एक अनुभव को साझा कर रही थीं .  इस वीडियो में वह बता रही हैं कि कैसे एक अग्नि मंदिर में धार्मिक रीति-रिवाज की वजह से उन्हें प्रवेश नहीं करने दिया गया था.  इस रिवाज की वजह से उन्हें मुंबई के अंधेरी के फायर टेंपल के बाहर खड़ा होना पड़ा था.
एक दूसरे ट्वीट में स्मृति ईरानी ने कहा कि वे जोरास्ट्रियन समुदाय की भावनाओं का सम्मान करती हैं और दो जोरास्ट्रियन बच्चों की मां होने के बावजूद अपने पूजा के अधिकार के लिए अदालत नहीं जाती . उन्होंने कहा कि पारसी या गैर पारसी रजस्वला महिलाएं भी एक अग्नि मंदिर में नहीं जाती हैं, चाहे वो किसी भी उम्र की हों .

अब सुनवाई 13 नवम्बर को

सबरीमाला मंदिर के कपाट खुलने के दिन से विभिन्न हिंदुवादी संगठन परंपरा पर हमला बता कर प्रदर्शन करते रहे. इस दौरान 10-50 आयुवर्ग की महिलाओं ने मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचने का प्रयास भी किया. लेकिन प्रदर्शनकारियों ने इन्हें रोक दिया. इस दौरान हिंसक झड़पें भी हुईं. दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार ( 22 अक्टूबर ) को कहा कि वह केरल के सबरीमाला मंदिर में हर आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने वाले उसके फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई 13 नवंबर को करेगा.

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