शाह के मैनेजमेंट और नीतीश की कोशिशों से राज्यसभा में कांग्रेस हुई चित

राज्यसभा के उपसभापति चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन उम्मीदवार हरिवंश नारायण सिंह 24 वोटों से जीते ही नहीं है, इस चुनाव ने उपसभापति पद पर 41 वर्षों से काबिज कांग्रेस को वितरित कर दिया है. साथ ही इस बात का संकेत भी मिल गया है की महत्वपूर्ण बिलों को राज्यसभा में अटकाने की कांग्रेस की ताकत भी कमजोर पड़ गई है. राजग गठबंधन लोकसभा के साथ राज्यसभा में मोदी सरकार के महत्वपूर्ण बिलों को आसानी से पारित करा सकेगा.
जनता दल यू के सांसद हरिवंश नारायण सिंह ने कांग्रेस के बीके हरिप्रसाद को 24 मतों से पराजित किया है. हरिवंश नारायण सिंह को 125 तो बीके हरिप्रसाद को 101 वोट प्राप्त हुए हैं. सामाजिक तौर पर देखने पर या संख्या बल के थोड़े से इधर उधर होने के रूप में देखा जा सकता है लेकिन राज्यसभा के अंदर इस महत्वपूर्ण बदलाव के साथ विपक्ष की ताकत के कमजोर पड़ने का संकेत भी साफ मिल गया है. अब तक कांग्रेस विपक्षी सहयोगियों के साथ मोदी सरकार के महत्वपूर्ण बिलों को राज्यसभा में लटकाती आई है. इसमें ओबीसी विधेयक में विपक्ष ने अपनी संख्या बल के आधार पर बदलाव करा लिया था. तीन तलाक बिल में भी मोदी सरकार को महत्वपूर्ण बदलाव करने पड़े हैं.
तीन तलाक बिल राज्यसभा में लंबे अरसे से अटका पड़ा है. मोदी सरकार को इसमें तीन तलाक के आरोपी प्रतियों को जमानत देने, समझौते का विकल्प खोलने और पड़ोसी को भी आरोपित करने के खिलाफ पत्नी या उसके रक्त संबंधी तक ही सीमित करने जैसे संशोधन कैबिनेट में करने पड़े हैं.
परंतु अब जदयू के नेता नीतीश कुमार ने उपसभापति चुनाव में राजद प्रत्याशी अपने सांसद की जीत के लिए उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक, तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से समर्थन हासिल करने की रणनीति बनाई. इस बात की भी संभावना है कि लोकसभा चुनाव में विपक्ष को सीमित करने के लिए भाजपा नेतृत्व नीतीश कुमार की भूमिका राजग में बढ़ा सकता है. इससे कई ऐसे दलों का समर्थन भी हासिल हो जाएगा जो अभी कांग्रेस या उसके समर्थन में कथित महागठबंधन में शामिल नहीं होना चाहते हैं. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का कुनबा मूवी नीतीश की भूमिका बढ़ने पर बढ़ सकता है, जोक महागठबंधन के लिए महामुसीबत साबित होगी.
इसका असर राज्यसभा में आने वाले दिनों में साफ तौर पर दिखने की संभावना है. उम्मीद की जा रही है कि अब सरकार के महत्वपूर्ण बिल राज्यसभा में भी उसी तरह पारित होंगे जैसे लोकसभा में होते आए हैं.
दूसरी ओर अमित शाह ने राजग में नाराज चल रही शिवसेना, अनमने अकाली दल और वाईएसआर कांग्रेस का पूरी तरह समर्थन हासिल करने की जिम्मेदारी खुद ली. इसके लिए पीयूष गोयल को भी शाह ने लगाया था. बताते हैं कि राज्यसभा में कांग्रेस के मजबूत संख्या बल को छिन्न-भिन्न करने के लिए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने माइक्रो मैनेजमेंट का सहारा लिया. 10 सदस्य टीम लगाकर कांग्रेस के साथ खड़े कई दलों को सदन से बाहर रहने के लिए राजी किया तो कुछ सदस्यों को भी मतदान में हिस्सा न लेने के लिए तैयार किया. इसी का नतीजा है कि संख्याबल में कमजोर होने के बावजूद राजद प्रत्याशी हरिवंश नारायण सिंह कांग्रेस की बीके हरिप्रसाद से आगे निकल गए.

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