सत्यम कंप्यूटर की राह il&fs, सरकार ने छह सदस्यीय प्रबंधन को सौंपी कमान

गंभीर वित्तीय संकट में फंसी एनबीएफसी इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंस सर्विसेज लिमिटेड il&fs के मौजूदा प्रबंधन को हटा दिया गया है. सरकार ने कंपनी को संकट से उबरने के लिए अच्छा सदस्य नए प्रबंधन की कमेटी बनाकर कामकाज उसे सौंप दिया है. नई कमेटी की अगुवाई देश के प्रमुख बैंकर उदय कोटक को इसका नया एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बनाया गया है. सरकार का यह प्रयास 2009 के सत्यम कंप्यूटर घोटाले के बाद उसे संकट से उबारने के किए गए प्रयासों जैसा ही है. हालांकि, यह पहला कदम बताया जा रहा है और अभी कई अन्य उपाय करने होंगे. वित्त मंत्रालय की तरफ से कंपनी को पूरी मदद का आश्वासन दिया गया है जिसमें अतिरिक्त वित्तीय मदद मुहैया कराना भी शामिल है.
वित्त मंत्रालय की तरफ से चयनित छह सदस्यों को जिम्मेदारी सौंपने के काम को राष्ट्रीय कंपनी कानून ट्रिब्यूनल यानि एनसीएलटी के निर्देश के बाद अंजाम दिया गया. नए प्रबंधन में उदय कोटक के अलावा टेक महिंद्रा के वाइस चेयरमैन विनीत नायर, सेबी के पूर्व चेयरमैन जीएन वाजपेई, आईसीआईसीआई बैंक के नॉन एग्जीक्यूटिव चेयरमैन जीसी चतुर्वेदी, आईएएस अधिकारी मालिनी शंकर और सेवानिवृत्ति ब्यूरोक्रेट नंदकिशोर सदस्य हैं.
वित्त मंत्रालय ने आज आईएलएंडएफएस की परिसंपत्तियों को बेचने का विकल्प भी खुला रखा है, ताकि इसकी देनदारी का समय पर भुगतान कर निवेशकों में भरोसा बहाल किया जा सके. माना जा रहा है कि il&fs में इक्विटी रखने वाली सरकारी क्षेत्र के संस्थान एलआईसी, एसबीआई और विदेशी वित्तीय संस्थानों की तरफ से अतिरिक्त वित्तीय मदद की भी जल्द घोषणा की जाएगी.
सूत्रों का दावा है कि नया प्रबंधन बगैर किसी देरी की काम शुरू कर देगा. इसकी पहली बैठक अगले दो-तीन दिनों के भीतर हो जाएगी. नए प्रबंधन की पहली वरीयता तत्काल सामने आने वाली देनदारी ओं के भुगतान के लिए नगदी का प्रबंधन करना होगा. इसका इंतजाम किन स्रोतों से किया जाए, इसे भी तय करने का काम किया जाएगा. दूसरी वरीयता अगले कुछ महीनों बाद आने वाली देनदारियों के भुगतान के लिए कुछ और समय हासिल करने की व्यवस्था करनी होगी. il&fs पर कुल ₹91000 करोड़ कर्ज है. सरकार मानती है कि इसके ढांचे के ढहने का मतलब होगा कि देश में बुनियादी क्षेत्र की कई परियोजनाओं का अधर में लटक जाना. एक बड़ी वजह है कि सरकारी से बचाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है.
आईएल&एफएस की स्थिति लगातार खराब होती जा रही थी. केंद्र सरकार की तरफ से एनसीएलटी की मुंबई बेंच में अतिरिक्त मांग करते हुए इसके पूरे प्रबंधन को बदलने का प्रस्ताव किया था. कुछ ही घंटे में एनसीएलटी ने इसे मंजूरी दे दी और सरकार की तरफ से नामित सदस्यों को इसका प्रबंधन भी सौंप दिया. सरकार की तरफ से प्रस्ताव किया गया था कि il&fs का मौजूदा प्रबंधन अपने मौजूदा दायित्वों को पूरा करने में पूरी तरह असफल रहा है. निजी क्षेत्र के कोटक महिंद्रा बैंक के एमडी और सीईओ उदय कोटक फिलहाल नई टीम की अगुवाई करेंगे. il&fs 2018 से तीन बार अपने बड़े भुगतान करने में विफल रही है. इस देश के दूसरे वित्तीय संस्थानों के आने के कयास लगाए जा रहे थे. इस वजह से ही सरकार का प्रबंधन निरस्त करने का कदम उठाना पड़ा है.
गौरतलब है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री मोदी पर आरोप लगाया था कि वह विदेशी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए il&fs में गरीबों की ओर से पाई पाई जोड़ कर जमा की गई पूंजी को डूबती कंपनी में लगाना चाहते हैं. एलआईसी il&fs में बड़ी पूंजी लगा रही है.

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