सबरीमाला मंदिर मामलाः सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ संशोधन याचिका दाखिल करेगी नायर सोसायटी

केरल के प्रभावशाली नायर समुदाय से जुड़ी नायर सर्विस सोसायटी ने सबरीमाला मंदिर मामले को फिर से उच्चतम न्यायालय में ले जाने का फैसला किया है. गुरुवार को सोसायटी ने ऐलान किया है कि सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश से सबंधित सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ संशोधन याचिका दाखिल की जाएगी. इसमें फैसले को बदलने की अपील की जाएगी. 
नयार सर्विस सोसायटी के महासचिव जी. सुकुमारन नायर ने कोट्टायम में कहा कि एनएसएस इस मामले में खुद ही एक पार्टी रही है. सुप्रीम कोर्ट में संशोधन याचिका दाखिल की जाएगी. श्री नायर ने कहा कि सरकार और त्रावणकोर देवस्वाम बोर्ड (टीडीबी) के स्टैंड निराशाजनक हैं. गौरतलब है कि केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई ने कहा था कि केरल सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं करेगी. साथ ही यदि महिलाओं ने मंदिर में पूजा की इच्छा दिखाई तो सरकार महिला पुलिस का इंतजाम करेगी.
इस मामला में नायर सोसायटी के महासचिव ने कहा कि टीडीबी भगवान अयप्पा मंदिर और 1200 अन्य मंदिरों का प्रबंधन करने वाला एक स्वतंत्रनिकाय है. इन मंदिरों के रीति-रिवाजों और परंपराओं की रक्षा करने की जिम्मेदारी है. इन मंदिरों को भक्तों द्वारा किए जाने वाले प्रस्तावों के जरिए प्रबंधित किया जाता है. शीर्ष अदालत में मामले में पार्टी के रूप में शामिल होने वाले एनएसएस ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार अदालत के आदेश को लागू करने में बेवजह जल्दी दिखा रही है.
सरकार और बोर्ड के इस स्टैंड ने अपने सरोकारों की रक्षा के लिए कदम उठाया है. सोसायटी के महासचिव ने सरकार से इस मुद्दे को सुलझाने के लिए कदम उठाने का आग्रह किया है. गौरतलब है कि केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपने आदेश के खिलाफ समीक्षा याचिका दायर करने की विपक्षी मांग को अस्वीकार कर दिया था. साथ ही यह दावा भी किया था कि तीर्थयात्रा के मौसम से सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू किया जाएगा.
त्रावणकोर देवस्थानम बोर्ड की एक बैठक 16 अक्टूबर को होगी. इसमें वार्षिक तीर्थयात्रा के लिए खुलने पर पहाड़ी मंदिर जाने वाली महिला तीर्थयात्रियों के लिए आवश्यक व्य़वस्था करने का भी फैसला किया है. सबरीमाला मंदिर अपनी पुरानी परंपरा के हिसाब से 10 से 50 आयु वर्ग की महिलाओं के लिए प्रतिबंधित था. मंदिर प्रशासन का तर्क था कि यह अवधि महिलाओं के मासिक धर्म की है. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में गठित पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने मंदिर में मासिक धर्म धर्म की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध को हटा दिया था.

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