50 हजार के इनामी अपराधी की नेपाल में तलाश, चार हत्याओं का आरोपी है राघवेंद्र

– नेपाल है सुरक्षित शरणगाह, यहां के अपराधिक छवि के नेता इन भारतीय भगोड़े अपराधियों को देते हैं शरण

मोहम्मद
सिद्धार्थ नगर। भारत के भगोड़े अपराधियों के लिए नेपाल सुरक्षित शरणगाह है, जब भी कोई अपराधी पुलिस के लिए चुनौती बनता है तो स्वाभाविक रूप से मान लिया जाता है कि वह नेपाल में शरण लेकर घटना को अंजाम दे रहा होगा, लिहाजा उसकी घेराबंदी नेपाल में शुरू हो जाती है।
गोरखपुर पुलिस के लिए चुनौती बना 50 हजार के इनामी बदमाश राघवेंद्र यादव के भी नेपाल में होने की संभावना है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें गठित की गई हैं, जो आसपास के जिलों से लेकर बिहार और नेपाल में उसकी तलाश में लगी हुई है। गोरखपुर की पुलिस फिलहाल इस संबंध में मुंह खोलने को तैयार नहीं है लेकिन नेपाल सीमा के एक थाने के एसओ ने अपनी शिनाख्त छिपाने की शर्त पर इस बात के संकेत दिए।
नेपाल भागकर ये शातिर वहां की राजनीतिक गतिविधियों में भी भाग लेने लगते हैं। कहा ये भी जाता है कि नेपाल में अपराधी छवि वाले नेता भारत के भगोड़े अपराधियों को बड़े गर्व से शरण देते हैं। राघवेंद्र के बारे में भी यह चर्चा है कि वह भारत की सीमा से सटे नेपाल के एक यादव जाति के पूर्व सांसद के संरक्षण में है।
सूत्रों से खबर मिली है कि गोरखपुर पुलिस ने राघवेंद्र की गिरफ्तारी के लिए नेपाल के तराई में अपने मुखबिरों का जाल बिछा दिया है। साथ ही भारतीय पुलिस अफसर नेपाली पुलिस अफसरों के साथ तालमेल बनाए हुए हैं। राघवेंद्र हाल ही गोरखपुर जिले के झंगहा थाना क्षेत्र के सुबहा गांव निवासी रिटायर्ड दरोगा जयहिंद और उनके बेटे नागेंद्र यादव की हत्या का मुख्य आरोपी है। राघवेंद्र पर चार हत्याओं का इलजाम है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का क्षेत्र होने के कारण राघवेंद्र को गिरफ्तार करना पुलिस के लिए बहुत ही जरूरी है।
पचास हजार का एक इनामी पकड़ा गया
आठ साल पहले फरार एक इनामी बदमाश को नेपाल से गिरफ्तार करने में सिद्धार्थनगर पुलिस को सफलता मिली है। पुलिस ने उसे नेपाल के तौलिहवा से गिरफ्तार किया है। चरस का शातिर तस्कर सुशील तिवारी आठ साल पहले सिद्धार्थनगर जेल से बस्ती ले जाते समय फरार हुआ था। मूलत:नेपाल के तौलिहवा का रहने वाले सुशील पर भी 50 हजार का इनाम था। फरारी के बाद सुशील नेपाल में सत्तारुढ़ वाम गठबंधन की राजनीति करने लगा था। सत्ता और प्रशासन पर मजबूत पकड़ के बावजूद सुशील तिवारी की गिरफ्तारी से नेपाल में छिपे भगोड़े भारतीय अपराधी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते फिर रहे हैं।

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