PMBJP में जनऔषधि केंद्रों की संख्या 4200 पार, 800 दवाइयों की उपलब्धता

प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना गरीबों के लिए रामबाण साबित हो रही है. महंगी दवाइयों को खरीदने की क्षमता न रखने वाले लोग देश के विभिन्न हिस्सों में खुले जनऔषधि केंद्रों से 800 से अधिक श्रेणी की जेनरिक दवाइयों के जरिए बीमारी की बाधा पार कर रहे हैं. यह केंद्र केवल दवा बिक्री के लिए काम नहीं कर रहे हैं, बल्कि बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार भी मुहैया करा रहे हैं. लोकप्रियता बढ़ने पर इन केंद्रों से आमजन भी दवाओं की खरीद करने लगे हैं.

केंद्र सरकार का दाव है कि परियोजना का मुख्य उद्देश्य 23 मुख्य श्रेणी की दवाइयों को कम दामों में उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था, जिसे प्राप्त कर लिया गया है. इन केद्रों के जरिए सर्जिकल उपकरण भी बेचे जा रहे हैं. 154 सर्जिकल और अन्य उत्पाद इन केंद्रों के जरिए बेचे जा रहे हैं. जनऔषधि केंद्रों के कारण ब्रांडेड व महंगी दवाइयों की बिक्री को भी चोट पहुंचने लगी है.  दवा विक्रेताओं का कहना है कि जिन क्षेत्रों में जन औषधि केंद्र खुले हैं वहां सामान्य रोगों की दवाओं के लिए लोग ब्रांडेड की बजाए सस्ती दवाओं पर जोर देने लगे हैं. फिलहाल, देश में अब तक 4200 से ज्यादा जनऔषधि केंद्र खुल चुके हैं. इनके जरिए 800 किस्म की जेनरिक दवाइयों की बिक्री की जा रही है. 

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