आमदनी छिपाने का हर जतन होगा नाकाम

आमदनी छिपाने का हर जतन होगा नाकाम

– आईटीआर फार्म में मांगी गई हर छोटी-बड़ी जानकारी

– आयकर विभाग के नए व्यूह को भेद पाना होगा असंभव

डेस्क। आकलन वर्ष 2018-19 के लिए नया आय कर रिटर्न (आईटीआर) फॉर्म नई व्यूह रचना के साथ आपका स्वागत करने के लिए आपके सामने आ गया है। इसमें पिछले वर्षों के मुकाबले करदाताओं से अधिक जानकारियां मांगी गई हैं। पिछले सालों के सभी फॉर्म (चाहे वे व्यक्तिगत करदाताओं के लिए हों या कारोबारों या फिर अन्य करदाताओं के लिए) में 25 से अधिक बदलाव किए गए हैं। अब करदाताओं को मदवार ब्योरा (ब्रेक-अप) और अन्य जानकारियां देनी होंगी। इससे आयकर अधिकारियों को करदाता की ओर से दाखिल रिटर्न से मिलान करने में मदद मिलेगी।
कर एवं वित्त सलाहकार सुनील कुमार सिंह कहते हैं, ‘ऐसा लगता है कि नए आईटीआर फॉर्म में छूट का दावा, खर्च या करों से छूट आदि के लाभ लेने की पूरी जिम्मेदारी करदाताओं पर ही डाल दी गई है।’
वेतन का मदवार ब्योरा
जिस व्यक्ति को वेतन के रूप में आय प्राप्ति होती है, जिसके पास अपना घर है और जिसे अन्य स्रोतों से आय प्राप्त होती है (जैसे ब्याज), वे एक पेज के बुनियादी फॉर्म आईटीआर-1 या सहज फॉर्म का इस्तेमाल करते हैं। पिछले आकलन वर्ष में करीब 3 करोड़ करदाताओं ने इस फॉर्म का इस्तेमाल किया था। अब इस फॉर्म में वेतन से जुड़ी अतिरिक्त जानकारियां मांगी गई हैं। करदाता को सबसे पहले वेतन के मद में प्राप्त हुई रकम (भत्ता एवं अन्य सुविधाएं शामिल नहीं) की जानकारी भरनी होगी। इसके बाद भत्ते, अन्य सुविधाएं और वेतन के बदले लाभ आदि (वेतन आय के हिस्से के रूप में नियोक्ता से मिली अतिरिक्त रकम, भत्ता आदि) की जानकारी देनी होगी। पिछले साल तक करदाता को वेतन के केवल कर योग्य हिस्से का जिक्र करना होता था। आवासीय जायदाद से प्राप्त आय के साथ भी यही बात लागू होती है। अब फॉर्म में करदाता को कुल किराए की प्राप्ति, स्थानीय निकायोंं को कर भुगतान आदि का मदवार ब्योरा देना होगा।
सुनील कहते हैं कि करदाताओं को पूंजीगत लाभ के मामले में भी अब खास जानकारी देनी होगी। नए आईटीआर फॉर्म में प्रत्येक पूंजीगत लाभ छूट की जानकारी देने के लिए अलग अलग कॉलम हैं। अब धारा 54, 54बी, 54ईसी, 54एफ, 54 जीबी और 115एफ के तहत हर पूंजीगत लाभ पर कर में छूट का विवरण संबंधित स्तंभ में देना होगा। इन पूंजीगत लाभ के लिए छूट पाने वाले करदाता को वास्तविक पूंजीगत परिसंपत्ति के हस्तांतरण की तारीख का जिक्र करना होगा, जो पिछले आईटीआर फॉर्म में नहीं था।
बजट में कर रिटर्न दाखिल करने में देरी पर जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है। अगर रिटर्न अंतिम तिथि (31) जुलाई के बाद लेकिन 31 दिसंबर से पहले दाखिल हुआ है तो 5,000 रुपये जुर्माना लगेगा और उसके बाद 10,000 रुपये भरने होंगे। कर विशेषज्ञों का मानना है कि नया आयकर सॉफ्टवेयर करदाता को जुर्माना दिए बिना रिटर्न भरने की प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति नहीं देगा। नए आईटीआर फॉर्म में विलंब शुल्क भरने के लिए अलग से कॉलम की व्यवस्था की गई है।
 पिछले साल की तरह प्रवासी अब आईटीआर-1 फार्म का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। वरिष्ठ कर एवं वित्त सलाहकार डॉ. पवन जायसवाल का कहना है कि ‘आईटीआर-1 फॉर्म न तो प्रवासियों और न ही सामान्य निवासियों के लिए लागू होगा। अब ऐसे लोगों को आईटीआर-2 फॉर्म में आय कर रिटर्न दाखिल करना होगा। प्रवासी भारतीय किसी विदेशी बैंक खाते का ब्योरा देकर उस खाते में रिफंड पा सकते हैं।’ पहले यह भेद नहीं होता था कि करदाता किस देश में है। जानकारों का दावा है कि रिटर्न का आकलन कंप्यूटर के जरिये किया जाता है। अधिकारी विभिन्न फॉर्म के जरिए अतिरिक्त आंकड़े मांग रहे हैं ताकि बेहतर अनुपालन के लिए विभिन्न लेनदेन का मिलान किया जा सके।
आईटीआर 4 में ज्यादा खुलासे
अनुमानित कराधान योजना यानी प्रीजंप्टिव टैक्सेशन स्कीम (छोटे कारोबारों जैसे फ्रीलांसरों, दुकानदारों और चिकित्सकों) में करदाताओं को हिसाब-किताब रखने या बहीखाता ऑडिट करवाने की जरूरत नहीं होती है। करदाता अपने राजस्व का कुछ प्रतिशत कर के रूप में दे सकते हैं। पुराने आईटीआर फॉर्म में केवल चार सूचनाएं- कुल कर्जदाता एवं कर्जदार, टोटल स्टॉक इन ट्रेड और कैश बैलेंस – मांगी जाती थीं। नए फॉर्म में कारोबार की अधिक वित्तीय जानकारियां मांगी गई हैं। इनमें सुरक्षित एवं असुरक्षित ऋणों की रकम, अग्रिम, स्थायी संपत्तियां, पूंजी खाते आदि का विवरण शामिल है। कर विशेषज्ञों का कहना है कि जिन सूचनाओं की मांग की गई है, उनकी जानकारी देने के लिए तो करदाता को बहीखाता रखना होगा।
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू किए जाने के बाद आवश्यक रूप से ये जानकारियां मांगी गई हैं। कारोबारी को करदाता का जीएसटी क्रमांक और दाखिल किए गए जीएसटी रिटर्न के आधार पर कारोबार की राशि की भी जानकारी देनी होगी। पहले कारोबारी अपनी सुविधा के अनुसार आयकर और अन्य अप्रत्यक्ष करों के लिए अलग-अलग राजस्व दिखाते थे। अब आईटीआर में दिए गए ब्योरे का जीएसटी रिटर्न के साथ मिलान किया जा सकता है। डा. जायसवाल कहते हैं कि नया अधिसूचित आईटीआर-2 फॉर्म उन लोगों के इस्तेमाल के लिए नहीं होगा जिन्हें किसी कारोबार या पेशे से लाभ या प्राप्ति होती है। अब ऐसे लोगों को रिटर्न दाखिल करने के लिए आईटीआर-3 का इस्तेमाल करना होगा। पिछले साल तक आईटीआर-2 का इस्तेमाल करने की अनुमति थी।
अब जीएसटी की जानकारी
कारोबारियों के लिए आईटीआर-6 में अब जीएसटी लेनदेन की भी जानकारी मांगी गई है। किसी कंपनी को छूट प्राप्त वस्तु एवं सेवाओं में लेनदेन, कंपोजिट सप्लायरों के साथ लेनदेन, पंजीकृत इकाइयों के साथ लेनदेन और उनको या गैर-पंजीकृत को कुल रकम के भुगतान का खुलासा करना होगा। कारोबार चलाने वालों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके जीएसटी रिटर्न इनकम टैक्स फॉर्म में दी गई जानकारियों से मेल खाते हों।

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