भाजपा से भड़क गया मूल वोटर, छह सितंबर को भारत बंद का आह्वान

सुप्रीम कोर्ट के फैसले को संसद में पलटकर दलितों के प्रति अति प्रेम दिखाना मोदी सरकार के लिए भारी पड़ता दिख रहा है. शुरुआती दिनों में खामोशी बनाए रखने के बाद संशोधित एससी-एसटी एक्ट के बाद बिहार के बाद सोमवार को मध्य प्रदेश में बड़ा आंदोलन हुआ. इसमें मुख्यमंत्री की गाड़ी पर पथराव भी किया गया. हालांकि, पथराव करने वालों से पुलिस निबटेगी लेकिन तमाम संगठनों ने इस कानून के खिलाफ छह सितंबर को भारत बंद का आह्वान कर मोदी सरकार और भाजपा शासित राज्य सरकारों के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं. उत्तर प्रदेश में भी पिछले कई दिनों से छोटे स्तर पर प्रदर्शन कर रहे संगठन भी इसमें शामिल होने की तैयारी में हैं. उधर, कई राजनीतिक पार्टियों की ओर से इस आंदोलन को पीछे से सपोर्ट भी शुरू कर दिया गया है जिससे भाजपा के खिलाफ सवर्णों को खड़ा किया जा सके.
मध्य प्रदेश में एससी-एसटी एक्ट के खिलाफ सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी कर्मचारी संस्था (सपाक्स) के द्वारा शुरू किया गया आंदोलन पूरे राज्य में फैल रहा है. मंगलवार यानी 4 सितंबर को सपाक्स ग्वालियर में एक बड़ी रैली का आयोजन कर रहा है. इसमें प्रदेश भर के लोगों को बुलाया गया है.
गौरतलब है कि एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ दलित संगठनों ने 2 अप्रैल को भारत बंद किया था. तब, सबसे ज्यादा हिंसा ग्वालियर और चंबल संभाग में हुई थी. अब सवर्ण, पिछड़ा और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को  एकजुट करने की कोशिश की जा रही है.
इस आंदोलन का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है कि मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में अगले कुछ महीनों में विधानसभा के चुनाव भी होने हैं. सभी पार्टियों ने इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं. सवर्ण जातियां लंबे समय से भाजपा की समर्थक रही हैं, लेकिन एससी-एसटी संशोधित कानून ने सवर्णों में नाराजगी बढ़ा दी है. यही वजह है कि सवर्णों की नाराजगी ने भाजपा की नींद उड़ा दी है. चर्चा यह भी है कि कांग्रेस पीछे से सवर्णों को उकसाने में लगी है. काग्रेस नेता यह कहते सुने जा रहे हैं कि एससी-एसटी कानून को कांग्रेस की सरकार में बहुत मजबूत नहीं किया गया था, लेकिन भाजपा ने वोट के लिए ऐसा कर दिया. फिलहला, आंदोलन के समर्थन में खड़ा होने से दलितों के बिदकने के डर से कांग्रेस ने भी चुप्पी बनाए रखी है.
फिलहाल, मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान इन दिनों ‘जन आशीर्वाद यात्रा’ पर निकले हैं. रविवार को सीधी जिले के चुरहट में उनके रथ पर अज्ञात लोगों ने पथराव कर दिया. इस पथराव में किसी को भी चोट नहीं पहुंची, लेकिन सीएम जिस गाड़ीनुमा रथ में सवार थे, उसके शीशे जरूर चटक गए. प्रदर्शनकारियों ने सीएम को काले झंडे भी दिखाए थे.
मंत्रियों का किया घेराव
ग्वालियर में सवर्ण समाज के लोगों ने केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर के घर का घेराव करते हुए उनसे इस्तीफे की मांग की थी. इससे पहले केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत शनिवार को गुना में थे, उनके साथ सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया भी थे. इस दौरान दोनों नेताओं को सपाक्स के लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा. ऐसे ही कुछ हालातों का सामना विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के संसदीय क्षेत्र विदिशा में करना पड़ा. सपाक्स लंबे समय से प्रमोशन में आरक्षण का विरोध कर रहा है. संगठन ने अपनी इस मुहिम में कई समाजों को भी जोड़ा है. इस मुहिम का सीधा असर कई जिलों में देखने को मिला.

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