फ्लाईओवर गाने के मामले में 4 इंजीनियर सस्पेंड, तीन सदस्यीय जांच कमेटी घोषित

वाराणसी के कैंट रेलवे स्टेशन के सामने निर्माणाधीन फ्लाईओवर के स्लैब गिरने के मामले में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कड़ी कार्रवाई की है. देर शाम वाराणसी पहुंचे उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में मुख्य परियोजना प्रबंधक एचसी तिवारी, परियोजना प्रबंधक के आर सूदन, सहायक अभियंता राजेश सिंह और अवर अभियंता लालचंद को देर रात निलंबित कर दिया है.

साथ ही मामले की जांच के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की 3 सदस्यीय टीम भी गठित कर दी गई है. टीम को 15 दिनों में रिपोर्ट देने के लिए निर्देश दिया गया है. दूसरी ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे की जांच के लिए कृषि उत्पादन आयुक्त राज प्रताप सिंह की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय कमेटी गठित किया है. कमेटी में सिंचाई विभाग के प्रमुख अभियंता, विभागाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक जल निगम शामिल हैं. इस कमेटी को 48 घंटे में घटना के सभी पहलुओं की जांच कर सीधे मुख्यमंत्री को रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है.
बता दें कि वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन के ठीक सामने निर्माणाधीन फ्लाईओवर मंगलवार की शाम करीब 5:20 बजे ढह गया. फ्लाईओवर के दो बीम जिनकी लंबाई करीब 70- 70 फीट बताई जा रही है, नीचे आ गिरीं. इनके नीचे दबने से करीब 20 लोगों की मौत हो गई है. कई गंभीर रूप से घायल हैं. दोनों बीम के नीचे करीब आधा दर्जन कारें दबकर पिचक गई. इन कारों में बैठे लोगों को निकालने का काम देर रात तक जारी रहा. बीम हटने के बाद कारों में बैठे हुए लोगों के शव निकाले जा सके. घटना को लेकर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और राष्ट्रपति ने गहरा शोक जताया है.
मामले में देर रात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी वाराणसी पहुंच गए. उन्होंने भी घटनास्थल को देखा. उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सेतु निगम के मुखिया होने के नाते देर शाम ही पहुंच चुके थे. उन्होंने घटनास्थल का जायजा लेने के साथ ही छानबीन शुरू कराई और लापरवाह पाए गए अभियंताओं को तत्काल सस्पेंड करने का आदेश भी जारी कर दिया है. सेतु निगम की पूरी टीम वाराणसी में डटी है. संभावना जताई जा रही है कि मुख्यमंत्री की ओर से घोषित उच्च स्तरीय कमेटी की रिपोर्ट के बाद मामले में सेतु निगम के कई और अफसर, वाराणसी ट्रैफिक पुलिस अफसर, प्रशासन के अफसर भी कार्रवाई की जद में आ सकते हैं. निर्माणाधीन पुल के नीचे ट्रैफिक कैसे आ जा रहा था? इसकी भी जांच कराई जा रही है. सामान्य तौर पर ऐसे मामलों में निर्माण के समय ट्रैफिक डायवर्ट किया जाता है. बताते हैं की गिरे फ्लाईओवर के आस-पास भी ट्रैफिक डायवर्जन का काम घटना के दौरान चल रहा था. अन्यथा मृतकों की संख्या और भी बढ़ सकती थी. फिर भी ट्रैफिक वहां तक कैसे पहुंचा? इसकी जांच हो रही है.

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