मिशन रफ्तारः इलाहाबाद-मुंबई रूट पर फर्राटा भरेंगी ट्रेनें

उत्तर मध्य रेलवे ने संरक्षित और सुगम ट्रेन संचालन सुनिश्चित करने के लिए छिवकी – मानिकपुर सेक्शन पर चार घंटे का मेगा ब्लॉक लेकर किया अनुरक्षण कार्य
रेल मंत्री पीयुष गोयल के मिशन रफ्तार को धार देने में अब तक सुस्त साबित हो रहा उत्तर मध्य रेलवे भी जुट गया है.  इलाहाबाद से मुगलसराय खंड पर ट्रैक नवीनीकरण के साथ रविवार को इलाहाबाद के छिवकी से मानिकपुर खंड में भी मरम्मत, सुधार व ट्रैक नवीनीकरण के कार्य किए गए. 52 किग्रा की पटरियों के स्थान पर 60 किलोग्राम की पटरियां डाली गईं. ज्यादा वजन की पटरियों को डालने से ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने में आसानी होगी.
रेल मंत्रालय संरक्षित रेल संचालन और एसेट रिलायबिलिटी को सुनिश्चित करने के लिये एसेट और उपकरणों जैसे रेलवे ट्रैक, प्वाइंट और क्रॉसिंग, ओवरहेड विद्युत उपकरण और सिग्नलिंग उपकरण आदि के अनुरक्षण को मिशन का रूप दिया है. ट्रेनों की लेटलतीफी और निरस्तीकरण में इसे भी बड़ा वजह माना जा रहा है. रेलवे अफसरों का कहना है कि सुधार व मरम्मत के बाद ट्रेनों की गति बढ़ना तय है. इससे ट्रेनों की लेटलतीफी भी काफी हद तक खत्म हो जाएगी.  उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक एमसी चौहान की सलाह पर “मेगा ब्लॉक” की अवधारणा को भारतीय रेल में पिछले दो महीने से प्रारंभ किया गया है. सप्ताह में एक बार होने वाले ऐसे मेगा ब्लॉक के दौरान इंजीनियरिंग, विद्युत और सिग्नलिंग इत्यादि जैसे विभिन्न विभागों के रखरखाव कार्यों के लिये विभिन्न मेंटेनेंस डिपो से मानव और मशीनों सहित अन्य संसाधनों को इकठ्ठा कर एक साथ काम किया जाता है.
08 जुलाई को उत्तर मध्य रेलवे के छिवकी -मानिकपुर खंड पर एक ऐसा ही मेगा ब्लॉक आयोजित किया गया. दोपहर 12 से शाम चार बजे तक के ब्लॉक अवधि के दौरान सेक्शन में खंड के संवेदनशील लिंक जं यार्ड में वेल्डिंग सहित थ्रू रेल रिन्यूवल और क्रॉसिंग रिन्यूवल, इरादतगंज और कटैयाडांडी यार्ड में स्विच नवीकरण, मानिकपुर यार्ड में संपूर्ण टर्नआउट रिन्यूवल कार्य के तहत 52 किलो से 60 किलो मे परिवर्तन, डभौरा यार्ड में यूनिमैट मशीन का उपयोग करके ट्रैक अनुरक्षण और पैकिंग कार्य, ओवरहेड विद्युत उपकरण रखरखाव कार्यं के तहत लिंक जं, इरादतगंज एवं जसरा यार्डों और मदरहा-लोहगरा, लोहगरा-बेवरा और बेवरा-शंकरगढ़ खंडों में किए गए.
महाप्रबंधक एमसी चौहान ने कहा कि, “किसी भी खंड में मेगा ब्लॉक से सेक्शन की आवश्यकताओं के लिए ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है और निर्धारित समय सीमा में सभी लक्षित कार्यों को पूरा किया जा सकता है. अनुरक्षण के लिए पूर्व-निर्धारित और योजनाबद्ध ब्लॉक के आयोजन से ट्रेन ऑपरेशन में प्रस्तावित परिवर्तनों की योजना पहले ही बना लिया जाता है. इससे उसकी सार्वजनिक रूप से घोषणा करने का भी मौका मिल जाता है. इससे यात्रियों की परेशानी कम हो जाती है.”

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