प्रत्येक जिले में बनेगी स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट, पारदर्शिता पर भी फैसला

उत्तर प्रदेश सरकार किस रूप से जुड़े मामलों को तेजी से निस्तारित करने के लिए प्रत्येक जिले में स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट गठित करने जा रही है. यही नहीं सभी रेलवे स्टेशनों पर भी जीआरपी में स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट गठित होगी. जहां यूनिट का गठन नहीं हो पाएगा वहां जीआरपी के पुलिस अधिकारियों को चाइल्ड वेलफेयर पुलिस अफसर नाम किया जाएगा. इस विशेष पुलिस का एक अलग कैडर भी बनेगा.
जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन एक्ट 2015) के तहत प्रत्येक राज्य को इसकी नियमावली अपनी आवश्यकता के अनुसार बनाना है. यूपी ने जुवेनाइल जस्टिस नियमावली-2018 का मसौदा बना लिया है. इसमें कई किस्म के बड़े बदलाव किए गए हैं. संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही इस मसौदे को प्रदेश कैबिनेट की मंजूरी दिलाई जाएगी. इसके बाद यह प्रदेश में लागू हो जाएगा.
किशोर कानून के तहत अपराध करने पर किशोरों को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पेश किया जाता है. दोषी मिलने पर इन्हें बाल सुधार गृह में रखा जाता है. इस एक्ट के लिए जो नियमावली बनाई गई है उसमें कई बदलाव किए जा रहे हैं कि किशोरों से जुड़े अपराधों के मामले में पूछताछ से लेकर उनसे निपटने के लिए जुवेनाइल पुलिस को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा. इस विशेष पुलिस का सभी जिलों में अलग कार्यालय भी बनेगा.
बिचौलियों को बाहर करने के लिए सब कुछ होगा ऑनलाइन
बाल सुधार गृहों के रजिस्ट्रेशन, इनमें भर्ती और सिलेक्शन से जुड़ी प्रक्रिया में दलालों और विचौलियों को बाहर करने के लिए पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी जाएगी. नियमावली के तहत बाल संरक्षण गृहों के रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था पारदर्शी करने के लिए ऑनलाइन की जाएगी. बाल कल्याण समिति वा जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में सदस्यों के सिलेक्शन भी ऑनलाइन किए जाएंगे. इसके लिए आवेदन हार्ड कॉपी से मंगाए जाते हैं. इनकी छंटनी में ही काफी दिक्कत होती है. साथ ही सीडब्ल्यूसी के ऑर्डर भी मैनुअल के बजाए सीधे ऑनलाइन पहुंचेंगे. जेजेबी जो ऑर्डर करेगा वह सीधे संरक्षण गृह में भी पहुंच जाएगा कि कौन सा किशोर गृह में आने वाला है. इसकी जानकारी तत्काल संरक्षण गृहों तक पहुंच जाएगी.

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