बोली आतंकी की बीवी- वह जिंदा लौटा तो खुद उसकी गर्दन काट दूंगी

‘हम सरेंडर के लिए नहीं कहेंगे. अब इस घर में उसकी सिर्फ लाश आएगी. अगर वह जिंदा आ भी गया, तो मैं खुद उसकी गर्दन काट दूंगी.’ दिल और दिमाग को झकझोर देने वाले यह शब्द आतंक के रास्ते पर जा चुके एक आतंकी की बीवी के हैं. दरअसल, जम्मू कश्मीर में इन दिनों सेना के अधिकारी उन नौजवानों के परिजनों से मिल रहे हैं जो आतंकियों के बहकावे में आकर आतंकी रास्ते पर निकल पड़े हैं. इसी कोशिश के तहत सेना के उच्च अधिकारी घाटी के एक परिवार से मिलने पहुंचे थे. सेना के अधिकारी आतंकी बन चुके युवक के पिता को समझाने की कोशिश कर रहे थे कि वह अपने बेटे को सरेंडर के लिए राजी करें. अधिकारियों ने समझाया, आतंकी रास्ते में कुछ नहीं रखा है. उसके पास अभी भी मौका है कि वह समाज की मुख्यधारा में लौट आए.
सेना के अधिकारी आतंकी के पिता को समझा रहे थे कि वह अपने बेटे को समझाएं. उनके कहने से सरेंडर नहीं करेगा. जब आप बोलोगे तभी बात मानेगा. सेना के अधिकारियों के समझाने पर आतंकी के पिता का जवाब था, सरेंडर कौन करता है? जो एक बार निकल गया, वह वापस कहां आता है? इस पर सेना के अधिकारियों ने समझाते हुए कहा, जरूरत पड़ी तब हम आपको बुलाएंगे. आपको पूरा मौका देंगे कि आप अपने बेटे को समझाकर सरेंडर के लिए राजी करें. सेना के अधिकारियों और आतंकी के पिता के बीच बातचीत चल ही रही थी. उसी दौरान आतंकी की पत्नी संवाद के बीच में आ गई. आतंकी की पत्नी का रुख बेहद तीखा था. आतंकी की पत्नी ने सेना के अधिकारी से सीधा सवाल किया, आपका क्या मतलब है? आप हमें क्यों बुलाएंगे?
आतंकी की पत्नी के सवाल पर सैन्य अधिकारियों ने कहा हम आपको इसलिए बुलाएंगे क्योंकि हो सकता है वह कभी किसी घर में फंस जाए तब हम आपको बुलाएंगे ताकि आप उसे समझा सकूं आप उसे समझाना युवा हथियार फेंक कर सेना के सामने सरेंडर कर दे इस पर आतंकी की पत्नी ने बेहद तीखा जवाब दिया हम नहीं बोलेंगे उसे सरेंडर करने के लिए करवा चंदा वापस आ भी जाए तो मैं खुद उसको अपने हाथों से मौत के घाट उतार दूंगी अपनी पत्नी के तल्ख तेवर देख सेना के अधिकारी भी बचत रह गए अधिकारियों ने दिखाते हुए एक बार फिर समझाने की कोशिश कि घर वापस आ जाए इससे अच्छी क्या बात हो सकती है.
आतंकी की पत्नी का रूख अभी भी सख्त और तीखा बना हुआ था. उसने सेना के अधिकारी की बात पर तुरंत पलटवार किया. और कहा, हमें क्या जरूरत है उसकी? हम क्यों उसको वापस लाएं? हमें कोई जरूरत नहीं है उसकी? सेना के अधिकारियों ने अपनी कोशिश जारी रखी और कहा, अक्सर बच्चे नाराज होकर घर से निकल जाते हैं. कभी-कभी भटक कर गलत रास्ते पर चले जाते हैं. हो सकता है उसका किसी से झगड़ा हुआ हो , मम्मी से या किसी और से?
आतंकी की पत्नी ने जवाब दिया न ही लड़ाई हुई है और न ही कोई झगड़ा है. उन्होंने जो भी किया, जैसे भी किया, मुझे पता नहीं. किसी को बताए बिना अपनी मर्जी से चले गए. उन्हें लग रहा है कि अच्छा किया है तो अच्छा ही किया होगा? अब हमें क्या लेना देना है? अब हम उनका मुंह नहीं देखना चाहते हैं. हम उसका मुंह उसी दिन देखेंगे जब उनकी लाश इस घर में आएगी. वह जिंदा आ गया तो मैं खुद उसकी गर्दन अपने हाथों से काट दूंगी. आतंकी की पत्नी की नाराजगी का आलम यह था कि वह किसी भी सूरत में अपने पति की शक्ल देखने को भी तैयार नहीं है जिसके बाद सेना के अधिकारी इस घर से वापस चले गए.

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