पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने देश की धर्मनिरपेक्षता और विकास पर बताया खतरा

भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने देश की धर्मनिरपेक्षता और विकास को खतरा बताया है. उनके इस बयान पर सियासी घमासान मच सकता है. पूर्व राष्ट्रपति ने एक चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा है कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद जनता को शामिल नहीं करता है. इसका तेजी से विकसित होना हानिकारक है. भारत में धर्मनिरपेक्षता और बहुलवाद जैसे सिद्धांत खतरे में हैं.
धर्मनिरपेक्षता और बहुलवाद पर हिंदुत्व की राजनीति पर उपराष्ट्रपति ने सवाल उठाया है कि यह भारतीय नजरिया है या नहीं? उन्होंने कहा कि भारत में दुनिया भर के विचार हैं. हम इन्हें भारत से अलग नहीं कर सकते हैं. यह कई तरह से भारत में विद्यमान हैं. चाहे इसे कोई भाषा के रूप में समझे, आदत के रूप में या फिर आस्था के रूप में, भारतीय जीवन की इस जटिलता पर सवाल पूछे जाते रहेंगे. आप सवालों के माध्यम से नई दुनिया की खोज समाप्त कर देंगे.
हामिद अंसारी ने सवाल उठाया कि राजनेताओं ने धर्मनिरपेक्षता को संविधान में क्यों रखा है? यदि आप बहु धर्मी समाज में रह रहे हैं तो इस देश और व्यक्तिगत धर्मों के बीच संबंध स्थापित करने के लिए आपको एक निश्चित फ्रेमवर्क तय करना होगा. उन्होंने इसे धर्मनिरपेक्षता के रूप में स्थापित किया है. हमारा एक दूरदर्शी विचार है कि स्टेट किसी भी निजी आस्था पर रोक नहीं लगा सकता और किसी को अपना धर्म चुनने से रोक नहीं सकता है.
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद राजनीति में एक गैर उदारवादी सिस्टम को जन्म देता है? के सवाल पर पूर्व उपराष्ट्रपति ने कहा, भारत में सभी को साथ लेकर चलने की परंपरा रही है. ताकि कोई छूट न जाए. यह बात हमारे संस्कारों में दिखाई देती थी. सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को संकुचित दायरे के लिए जाना जाता है. यह बताता है कि अगर आप यहां पैदा हुए हैं. आप एक निश्चित धर्म को मानते हैं तो आप भारतीय हैं. अन्यथा आप किसी की दया पर जीने वाले भारतीय हैं. सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के साथ यही एक परेशानी है. हमारा समाज एक मिश्रित और विविधता से भरा समाज है. सैकड़ों भाषाएं हैं. हमारी मुद्रा भी विविधता को दर्शाती है. यहां तक कि हमारा खाना भी हमारी विविधता को दिखाता है.
पूर्व उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय सांस्कृतिक राष्ट्रवाद अल्पसंख्यकों को बाहर रखने के लिए स्थापित किया गया एक प्रोपोगंडा है. उनका कहना है कि जो लोग इस तरह के राष्ट्रवाद को स्थापित करना चाहते हैं, उनके व्यवहार से तो ऐसा ही प्रतीत होता है.

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