चीन के केरुंग से काठमांडू तक रेलवे लाइन का डीपीआर तैयार

तय लक्ष्य से पहले ही रेलमार्ग का सर्वे पूर्ण, चीन देगा सहूलियत पर ऋण, नेपाल मांग रहा पूर्ण अनुदान, भारतीय कूटनीति के लिए नई चुनौतियां भी खड़ी होने की है आशंका

अरुण वर्मा

काठमाण्डू(नेपाल)ः चीन के केरुङ से नेपाल की राजधानी काठमाण्डू तक रेलमार्ग का प्रारम्भिक सम्भाव्यता रिपोर्ट तैयार कर लिया गया है. 31 अगस्त 18 तक को लक्ष्य ले काम कर रही चीनी प्राविधिक टोली ने एक माह पूर्व ही इस काम को पूरा कर लिया है. डीपीआर चीनी कम्पनी चाइना रेलवे फस्ट सर्वे एण्ड डिजाइन इंस्टीट्यूट के द्वारा तैयार किया गया है. इसे 20 अगस्त 18 को भौतिक पूर्वाधार मन्त्रालय एवं रेलवे विभाग के अधिकारी लेकर चीन जाएंगे। रेल विभाग के एक उच्च अधिकारी के अनुसार भौतिक पूर्वाधार तथा यातायात व्यवस्था मन्त्रालय के सचिव अन्य अधिकारी इस टीम में जाएंगे.
चीन सरकार ने अपने खर्च पर नेपाल के काठमाण्डू व चीन के केरुंग को जोड़ने वाली रेलवे लाइन निर्माण के बावत डीपीआर रिपोर्ट तैयार कर लिया है. मई माह में यातायात सचिव मधुसदन अधिकारी के नेतृत्व में नेपाली प्रनिनिधि मण्डल डीपीआर के लिए चीन से समझौता किया था. इसके बाद से चाइना रेलवे फस्ट सर्वे एण्ड डिजाइन इंस्टीट्यूट के द्वारा इसका भौतिक सत्यापन कर इसका रिपोर्ट तैयार की गई.  इस रिपोर्ट के साथ ही साथ चीनी अध्ययन टोली ने काठमाडू-पोखरा व काठमाडू–लुम्बिनी रेलमार्ग निर्माण सम्भव होने की बात कही है. चीन के द्वारा सन् 2006 में 11 सौ किमी लंबा रेलमार्ग तिब्बत की राजधानी ल्हासा तक बनाया गया है.
इस समय ल्हासा–सिगात्से रेलमार्ग का काम चल रहा है. वहीं, इसी रेल लाइन का नेपाल सीमा के केरुङ तक का विस्तारीकरण का काम भी चल रहा है. अब चीन से नेपाल को जोड़ने में महज एक पेच फसता यही दिख रहा है कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए चीन मित्र राष्ट्र नेपाल को सहूलियत पर ऋण देने की बात कह रहा है. जबकि, नेपाल सरकार इस परियोजना को अनुदान में करने का आग्रह कर रहा है.
फिलहाल, चीन-नेपाल के बीच प्रस्तावित यह रेलमार्ग सिर्फ यातायात का साधन ही नहीं बनेगा. बल्कि, यह भारत-नेपाल के रिश्तों पर असर डालने वाला होगा. भारतीय रेल पिछले कई सालों से नेपाल के शहरों को जोड़ने की योजना पर काम कर रहा है लेकिन कार्य की धीमी गति के कारण चाइनीज रेल को भारतीय सीमा तक विस्तार तक मौका मिला है. वित्तीय अड़चन न हुई तो अगले कुछ वर्षों में नेपाल और चीन के बीच रेल संपर्क भी बहाल होना तय दिख रहा है जो भारतीय कूटनीति के लिए नेपाल में नई चुनौतियां भी लेकर आ रही है.

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