भीड़तंत्र को हत्या की इजाजत नहीं दी जा सकती : सुप्रीम कोर्ट

लिंचिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जारी किए निर्देश, कहा-कानून का शासन कायम रहे यह सुनिश्चित करना सरकार का कर्तव्य है.
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गोरक्षा और बच्चा चोरी के नाम पर लिंचिंग ( भीड़ की हिंसा ) मामले में मंगलवार को कहा कि कोई भी अपने आप में कानून नहीं हो सकता है और देश में भीड़तंत्र की इजाजत नहीं दी जा सकती है. कोर्ट ने लिंचिंग पर सरकार को नसीहत देते हुए गाइडलाइंस जारी किया है.
सुप्रीम कोर्ट ने ये कहा-
भीड़तंत्र को इजाजत नहीं दी जा सकती है.
कानून का शासन कायम रहे यह सुनिश्चित करना सरकार का कर्तव्य है.
कोई भी नागरिक कानून अपने हाथों में नहीं ले सकता है.
संसद इस मामले में कानून बनाए और सरकारों को संविधान के अनुसार काम करना चाहिए.
भीड़तंत्र के पीड़ितों को सरकार मुआवजा दे.
सरकार हर जिले में एसपी स्तर के अधिकारी को नोडल अफसर नियुक्त करे, जो टास्कफोर्स का गठन करे
राज्य सरकारें ऐसे इलाकों की पहचान करें जहां वारदातें हुईं हैं
केंद्र और राज्य सरकार इस मॉब हिंसा के खिलाफ प्रचार-प्रसार करे
ऐसी दशा में तुरंत केस दर्ज हो और फास्ट ट्रैक कोर्ट में केस चले, अधिकतम सजा मिले
पीड़ित के वकील का खर्च सरकार वहन करे और 30 दिन में मुवावजा दे.
चार हफ्ते में लागू करें सरकारें
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 4 सप्ताह में केंद्र और राज्य सरकार अदालत के आदेश को लागू करें. ये सिर्फ कानून-व्यवस्था का सवाल नहीं है, बल्कि गोरक्षा के नाम पर भीड़ की हिंसा क्राइम है. अदालत इस बात को स्वीकार नहीं कर सकती कि कोई भी कानून को अपने हाथ में ले. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि राज्य और केंद्र सरकार भविष्य में माब लिंचिंग की वारदातों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाएं . सुप्रीम कोर्ट अब 28 अगस्त को इस मामले में आगे कार्रवाई करेगा.
कब-कब हुईं घटनाएं
महाराष्ट्र के धुले में पहली जुलाई को बच्चा चोर समझ कर भीड़ ने पीट-पीट कर पांच लोगों की हत्या कर दी थी.
त्रिपुरा में 28 जून को तीन लोगों की हत्या कर दी गई. इनमें से एक तो अफवाहों के खिलाफ कैम्पेन चलाता था.
असम में दो ट्यूरिस्ट की भीड़ ने हत्या कर दी .
मई में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में 8 लोगों की हत्या कर दी गई.
अभी हाल में बच्चा चोर कहकर गूगल के एक इंजीनियर को पीट कर मार डाला गया.