अरुषि मर्डर केसः सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार की सीबीआई की याचिका

देश की सबसे सनसनीखेज और मर्डर मिस्ट्री बनी अरुषि मर्डर केस में सुप्रीम कोर्ट ने तलवार दंपत्ति और उततर प्रदेश सरकार को बड़ा झटका दिया है. सबसे बड़ी अदालत ने इस मामले में सीबीआई की याचिका स्वीकार कर सुनवाई के लिए यूपी सरकार और तलवार दंपत्ति को नोटिस जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की याचिका को स्वीकार करते हुए आरोपी हेमराज की पत्नी की याचिका के साथ जोड़ दिया है. अब दोनों मामलों की एक साथ सुनवाई होगी. माना जा रहा है कि सुप्रीम अदालत के इस निर्णय से तलवार दंपत्ति की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.
गौरतलब है कि नोएडा के डॉक्टर दंपत्ति राजेश तलवार और नूपुर तलवार को उनकी अपनी बेटी आरुषि और घरेलू नौकर हेमराज की हत्या से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए 12 अक्तूबर 2016 को बरी कर दिया था. हाईकोर्ट का यह फैसला सीबीआई की ओर से कोई ऐसा पुख्ता सबूत प्रस्तुत न करने पर हुआ था जिससे यह साबित हो सकता कि राजेश और नूपुर ही बेटी आरुषि और हेमराज के हत्यारे हैं. हाईकोर्ट ने सीबीआई की जांच में कई खामों की ओर भी इशारा किया था.
बताते हैं कि स्टैंडर्ड आपरेशनल प्रोसीजर के तहत एजेंसी को निचली अदालत के आदेश की प्रति मिलने के 90 दिनों के अंदर ऊपरी अदालत में अपील दाखिल करना होता है. जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार सीबीआई के शीर्ष स्तर पर अभी यह तय किया जाना बाकी है कि हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील दाखिल की जाए या नहीं. कानूनी विशेषज्ञों की राय है कि सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल करनी चाहिए. परंतु, करीब दो वर्ष की देरी के लिए सीबीआई को क्षमायाचना के तहत अपील करनी होगी.
क्या था मामला
16 मई 2008 को नोएडा के जलवायु विहार में तलवार दंपत्ति के घर पर आरुषि का शव उसके बेडरूम में मिला था. पहले आशंका जताई गई कि घर के नौकर हेमराज ने यह हत्या की लेकिन दूसरे दिन हेमराज का शव भी डॉक्टर दंपत्ति के मकान की छत पर मिला. नोएडा पुलिस ने तलवार दंपत्ति पर हत्या की आशंका जताते हुए केस दर्ज किया. पुलिस का शक था कि दंपत्ति ने आरुषि और हेमराज को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया होगा. इसके बाद क्रोध में दोनों की हत्या कर दी. बाद में यह केस नोएडा पुलिस से सीबीआई को सौंप दिया गया.
सीबीआई ने जांच में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की. इसमें जांच एजेंसी का कहना था कि तलवार दंपत्ति को हत्याओं के लिए दोषी साबित करने लायक सबूतों का अभाव है. हालांकि, सीबीआई की विशेष अदालत ने इस तर्क को खारिज कर दिया. साथ ही 2013 में डॉक्टर दंपत्ति को बेटी और नौकर की हत्या के लिए दोषी मानते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई. इसके खिलाफ दंपत्ति इलाहाबाद हाईकोर्ट गए थे.

 

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