राम मंदिर आंदोलन के पुरोधा कटियार को BJP ने राज्यसभा से ‘राम-राम’ बोला

विनय कटियार ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1970 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संगठन सचिव के तौर पर की थी.

लखनऊ: कभी राम मंदिर आंदोलन के पुरोधा रहे विनय कटियार को भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा से ‘राम-राम’ कह दिया है. राज्यसभा में विनय कटियार का कार्यकाल खत्म हो रहा है और बीजेपी ने उन्हें दोबारा प्रत्याशी नहीं बनाया. रविवार को अलग-अलग प्रदेशों के लिए जारी आखिरी सूची में विनय कटियार का नाम शामिल नहीं है.
विनय कटियार को दोबारा प्रत्याशी नहीं बनाए जाने पर पार्टी की तरफ से कोई प्रातक्रिया सामने नहीं आई है. चर्चा है कि पार्टी उन्हें लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है. कटियार को 2019 में लोकसभा का चुनाव भी लड़ाया जा सकता है. कटियार ने कहा, “लिस्ट में नाम नहीं होने पर मैं कुछ नहीं कह सकता. वैसे तीन बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा का सांसद रह चुका हूं. पांच बार सांसद रहा हूं. अब पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी उसे देखेंगे.”
वहीं, 2019 के लोकसभा चुनाव लड़ने पर कटियार ने कहा, “अब जो पार्टी का आदेश होगा, उसका पालन होगा. वैसे राजनीति में सिर्फ काम किया जाता है.”
विनय कटियार फैजाबाद लोकसभा सीट से तीन बार सांसद रह चुके हैं. वे 1991, 1996 और 1999 में लोकसभा के लिए चुने गए थे. वे वर्तमान में राज्यसभा के सांसद हैं और उनका कार्यकाल 23 मार्च को ख़त्म हो रहा है.

राम मंदिर आंदोलन में निभाई थी अहम भूमिका
बजरंग दल के संस्थापक सदस्य और अध्यक्ष विनय कटियार बाबरी विध्वंस मामले में आरोपी हैं. राम मंदिर आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले कटियार पर 1992 में विवादित ढांचे को गिराए जाने से पहले भड़काऊ भाषण देने का भी आरोप है. उस समय कटियार फैजाबाद से बीजेपी के लोकसभा सांसद थे. फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है. इस मामले में लालकृष्ण आडवानी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती भी सहआरोपी हैं.

एबीवीपी से की थी राजनीतिक शुरूआत
विनय कटियार ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1970 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संगठन सचिव के तौर पर की थी. 1980 में वे आरएसएस के पूर्णकालिक प्रचारक बने. 1982 में उन्होंने हिंदू जागरण मंच की स्थापना की. 1984 में वे बजरंग दल के संस्थापक सदस्य बने. राम मंदिर आन्दोलन को धार देने के लिए उन्हें यूपी बीजेपी का अध्यक्ष भी बनाया गया. वे 2002 से 2004 तक यूपी बीजेपी अध्यक्ष रहे.

 

 

यूपी में राज्यसभा चुनाव घमासान को भाजपा ने 11 प्रत्याशी उतारे

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राज्य सभा का चुनाव के लिए 11 प्रत्याशी मैदान में उतार कर सियासी भूचाल खड़ा कर दिया है। 10 राज्यसभा सीटों पर 23 मार्च को होने वाला चुनाव अब दिलचस्प मोड़ लेता दिख रहा है. नामांकन के आखिरी दिन सोमवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली सहित बीजेपी के 11 प्रत्याशियों के नामांकन दाखिल कर दिया है. इसी चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी ने जया बच्चन और बहुजन समाज पार्टी ने भीमराव आम्बेडकर को प्रत्याशी बनाया है.
बीजेपी ने पहले अरुण जेटली और रविवार रात 7 और प्रत्याशियों की घोषणा की. उन्होंने सोमवार को अपना नामांकन दाखिल कर दिया. इसके बाद नवीं सीट के लिए बीजेपी ने कारोबारी अनिल अग्रवाल का पर्चा दाखिल करा दिया. बात यहीं रुकी। 9वें प्रत्याशी को लेकर राजनीतिक सरगर्मी चल रही थी। उसी दौरान खबर आई कि शायद किसी प्रत्याशी का पर्चा तकनीकी त्रुटि के कारण खारिज भी हो सकता है. अचानक विधानसभा के टंडन हॉल में गहमागहमी तेज हो गई और बीजेपी की तरफ से 10वें और 11वें प्रत्याशियों ने भी पर्चा दाखिल कर दिया. विद्यासागर सोनकर और सलिल विश्नोई ये प्रत्याशी हैं.
माना जा रहा है कि कुल 11 प्रत्याशियों में से अगर किसी के नामांकन को रद्द नहीं किया गया तो बाद में दो प्रत्याशी नाम वापस लेंगे. कारण ये है कि संख्या बल के लिहाज से बीजेपी 8 सीटों पर तो आसानी से जीत दर्ज करेगी. लेकिन इसके बाद एक और नवीं सीट के लिए उसे जोड़तोड़ का सहारा लेना पड़ेगा. समाजवादी पार्टी 47 विधायकों के साथ एक सीट जीतने में पूरी तरह सक्षम है.

दिलचस्प ये है कि शेष बची एक सीट के लिए एक तरफ बीजेपी खड़ी होगी, वहीं दूसरी तरफ बसपा. बसपा ने प्रत्याशी के ऐलान से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस से समर्थन मांगा था. सोमवार को ही सपा और कांग्रेस ने बसपा प्रत्याशी को समर्थन का ऐलान कर दिया था.

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